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क्या एनसीपी का कांग्रेस में विलय होगा

महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा से राजनीति गरमायी

  • ऑपरेशन लोट्स से बचने की कवायद

  • सांसद और विधायकों पर सस्पेंस बढ़ा

  • एनडीए में जाने की दूसरी चर्चा भी है

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर बढ़ गई है और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) के भविष्य को लेकर नई अटकलें लगाई जा रही हैं। कांग्रेस के साथ पार्टी के प्रस्तावित विलय को समर्थन न मिलने की खबरों के बाद, अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पार्टी एनडीए के साथ जाने के विकल्पों को टटोल सकती है। हालांकि राकांपा (एसपी) ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन ये अटकलें ऐसे समय में आई हैं जब विपक्षी महा विकास अघाड़ी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, राकांपा (एसपी) ने विलय के प्रस्ताव को लेकर दो बार कांग्रेस से संपर्क किया था। गौरतलब है कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस-राकांपा (एसपी) के विलय की संभावना पर चर्चा हुई थी, लेकिन चुनाव अभियान के कारण इसे टाल दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को इस प्रस्ताव पर चर्चा करने को कहा था। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने अपनी महाराष्ट्र इकाई से प्रतिक्रिया मांगी, जहां अधिकांश राज्य नेताओं ने कथित तौर पर इस कदम का विरोध किया। नतीजतन, माना जा रहा है कि विलय का प्रस्ताव अब ठंडे बस्ते में चला गया है।

बगावत के डर से बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता विलय को लगे इस कथित झटके ने एमवीए की एकजुटता पर ऐसे समय में सवाल खड़े किए हैं, जब गठबंधन हाल के महीनों में पहले ही राजनीतिक झटके झेल चुका है। इसमें शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत शामिल है, जहां छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए।

हालांकि, इनमें से किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राकांपा (एसपी) नेता और विधायक रोहित पवार ने इन खबरों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कांग्रेस में विलय, एनडीए में शामिल होने या सत्तारूढ़ गठबंधन को बाहर से समर्थन देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनके मुताबिक, ये महज राजनीतिक अफवाहें हैं जिनमें कोई सच्चाई नहीं है।