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भारत में पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है

चौक चौराहों पर जारी चर्चा के बीच सरकार की सफाई

  • पाइप से गैस आपूर्ति के नियम लागू हुए

  • पेट्रोल पंपों में आपूर्ति नियमित और सामान्य

  • जमाखोरी करने वालों को सरकार की चेतावनी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों पर रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत तथा इसके परिणामस्वरूप दोबारा लॉकडाउन लगने की भ्रामक खबरें प्रसारित हो रही थीं। केंद्र सरकार ने इन सभी खबरों का कड़े शब्दों में खंडन करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जनता को आश्वस्त किया है कि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुरक्षित और सुदृढ़ है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार उपलब्ध है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि देश की सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियां अपनी उच्चतम क्षमता के साथ क्रियाशील हैं। उनके पास न केवल तैयार उत्पादों का स्टॉक है, बल्कि कच्चे तेल का भी पर्याप्त इन्वेंट्री बैकअप मौजूद है।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में आकर ईंधन का भंडारण न करें। खुदरा बिक्री केंद्रों (पेट्रोल पंपों) पर आपूर्ति सामान्य है और परिवहन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है। सरकार का कहना है कि इस तरह की अफवाहें केवल अव्यवस्था पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं, जिनसे बचने की आवश्यकता है।

ईंधन वितरण प्रणाली को आधुनिक और अधिक कुशल बनाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस की आधारभूत संरचना तैयार हो चुकी है और कनेक्टिविटी उपलब्ध है, वहां घरों में पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से बंद कर दी जाएगी।

इस निर्णय के पीछे सरकार का तर्क है कि पीएनजी, एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित, सस्ती और निरंतर उपलब्ध रहने वाला विकल्प है। इससे न केवल सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के झंझट से मुक्ति मिलेगी, बल्कि सड़कों पर गैस सिलेंडरों के परिवहन का बोझ भी कम होगा, जिससे रसद लागत में कमी आएगी। यह कदम भारत को गैस-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

ईंधन की कीमतों के नाम पर आम जनता के साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने 25 मार्च, 2026 को एक निर्णायक आदेश जारी किया है। प्राधिकरण के संज्ञान में आया था कि कई होटल और रेस्तरां अपने बिलों में एलपीजी शुल्क या ईंधन लागत वसूली जैसे अतिरिक्त अधिभार जोड़ रहे हैं।

सीसपीए ने इसे अनुचित व्यापार प्रथा घोषित करते हुए सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि सेवा क्षेत्र में ऐसी अवैध वसूली तुरंत रोकी जाए। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यावसायिक संस्थान उपभोक्ताओं से इस तरह के अतिरिक्त पैसे वसूलता पाया गया, तो उसके खिलाफ भारी जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार का यह कदम सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं के आर्थिक हितों की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।