Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
AAP Action: आम आदमी पार्टी ने 7 बागी राज्यसभा सांसदों पर लिया बड़ा एक्शन, सदस्यता रद्द करने के लिए स... Rahul Gandhi at Gargi College: 'Gen Z हमारा भविष्य', गार्गी कॉलेज की छात्राओं से और क्या बोले राहुल ... Arvind Kejriwal in Bengal: ममता के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल, बंगाल में बोले- यह लोकतंत्र बचान... धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान: नागपुर में बोले- 4 बच्चे पैदा करें हिंदू, एक को बनाएं RSS का स्वयंसे... Thanthania Kalibari: कोलकाता के ठनठनिया कालीबाड़ी मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, जानें 300 साल पुराने इस मं... PM Modi in Bengal: बंगाल में ममता बनर्जी पर बरसे पीएम मोदी, कहा- 'मां, माटी और मानुष' के नाम पर हुए ... Viral News: बाहर से किताबें खरीदने पर भड़की प्रिंसिपल, अभिभावक को 10 बार बोला- ‘You Shut Up’, वीडियो... Ganga Expressway Inauguration: 29 अप्रैल को होगा गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन, जानें 594 किमी लंबे प... Gumla News: गुमला में बारात से लौट रही गाड़ी पलटी, भीषण हादसे में 2 लोगों की मौत, शादी की खुशियां मा... Road Accident: बेटी की शादी के बाद लौटते समय दर्दनाक हादसा, मां-बाप और बेटे की मौत से परिवार उजड़ा

एम आरएनए इंजेक्शन से अब खुद ठीक होगा टूटा हुआ दिल

वैज्ञानिकों ने पायी हृदय रोग विज्ञान में क्रांतिकारी सफलता

  • शोध का मुख्य आधार और प्रक्रिया

  • रिजेनेरेटिव दवा की दिशा में सफलता

  • परीक्षण के परिणाम और भविष्य की राह

राष्ट्रीय खबर

रांचीः चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में 20 मार्च 2026 की तारीख एक मील का पत्थर साबित हुई है। कार्डियोलॉजी (हृदय विज्ञान) के क्षेत्र में काम कर रहे शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में हार्ट अटैक के बाद होने वाली मौतों और ‘हार्ट फेलियर’ की समस्या को जड़ से समाप्त कर सकती है। यह तकनीक मैसेंजर आरएनए पर आधारित है, जिसका सफल प्रयोग हमने कोविड-19 टीकों के दौरान देखा था।

देखें इससे संबंधित वीडियो

लंबे समय से वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मानव हृदय की मांसपेशियां चोटिल होने या हार्ट अटैक के बाद खुद को पुनर्जीवित नहीं कर पातीं। जब हृदय की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वे मर जाती हैं और वहां ‘स्कार टिश्यू’ (घाव के निशान) बन जाते हैं, जिससे दिल कमजोर हो जाता है।

हालिया शोध में, वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार का  एम आरएनए इंजेक्शन तैयार किया है। यह इंजेक्शन सीधे हृदय की मांसपेशियों में जाकर उन प्रोटीनों को सक्रिय करता है, जो कोशिका विभाजन के लिए जिम्मेदार होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, यह इंजेक्शन हृदय को यह निर्देश देता है कि वह अपनी मृत कोशिकाओं के स्थान पर नई और स्वस्थ कोशिकाएं पैदा करे।

चूहों और सूअरों पर किए गए हालिया परीक्षणों में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। इंजेक्शन दिए जाने के मात्र 48 घंटों के भीतर, परीक्षण किए गए जीवों के हृदय की कार्यक्षमता में 25 से 30 प्रतिशत तक का सुधार देखा गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस प्रक्रिया में हृदय की संरचना में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं आया।

यह तकनीक न केवल हार्ट अटैक के मरीजों के लिए वरदान है, बल्कि उन लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो जन्मजात हृदय विकारों से जूझ रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अगले एक वर्ष में मानव परीक्षण सफल रहते हैं, तो 2027 के अंत तक यह उपचार अस्पतालों में उपलब्ध हो सकता है। यह रीजेनरेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।

#हृदयविज्ञान #मेडिकलन्यूज #स्वस्थदिल #विज्ञानप्रौद्योगिकी #HeartHealth #mRNATechnology #MedicalBreakthrough #Cardiology #FutureOfMedicine