अपनी तरफ से कोई कसर छोड़ना नहीं चाहता चुनाव आयोग
राष्ट्रीय खबर
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और अभूतपूर्व निर्णय लिया है। आयोग ने तय किया है कि 4 मई को होने वाली मतगणना के बाद भी राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 500 कंपनियां तैनात रहेंगी। यह कदम चुनाव के बाद होने वाली संभावित हिंसा को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पिछली घटनाओं और राज्य के चुनावी इतिहास को देखते हुए यह फैसला अनिवार्य था। सुरक्षा बलों की एक कंपनी में लगभग 90 से 125 जवान होते हैं, जिसका अर्थ है कि हजारों की संख्या में केंद्रीय बल चुनाव परिणाम आने के बाद भी जमीन पर मुस्तैद रहेंगे। इसके अतिरिक्त, 200 अन्य कंपनियां विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए तैनात की जाएंगी। यह तैनाती मतगणना प्रक्रिया के पूरी तरह संपन्न होने तक जारी रहेगी।
इसी कड़ी में, चुनाव आयोग ने मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है। गुरुवार को लिए गए इस निर्णय के बाद एनआईए की एक टीम जल्द ही बंगाल पहुंचकर जांच शुरू करेगी। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की उन सख्त टिप्पणियों के बाद हुई है, जिसमें अदालत ने राज्य प्रशासन को पूरी तरह विफल बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची संशोधन अभ्यास के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई इस घटना को बेहद निंदनीय करार दिया था।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि इस मामले की जांच या तो एनआईए करे या सीबीआई, और इसमें केंद्रीय बलों का सहयोग लिया जाए। अदालत के इसी रुख को देखते हुए चुनाव आयोग ने एनआईए से प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे अदालत में पेश करने को कहा है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने निर्धारित हैं। आयोग की इन सख्त तैयारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें और चुनावी प्रक्रिया के बाद भी राज्य में लोकतांत्रिक मर्यादा बनी रहे।