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हम महिला आरक्षण का समर्थन करेंगेः जयराम रमेश

परिसीमन के सरकारी फार्मूला का विरोध करेगी कांग्रेस

  • राज्यों के शक्ति संतुलन पर संकट

  • संख्याबल का संतुलन बिगाड़ देगा

  • सत्र और आचार संहिता पर सवाल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की पहल पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी महिला आरक्षण का स्वागत करती है, लेकिन सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित समानुपातिक परिसीमन फॉर्मूले का पुरजोर विरोध करेगी।

कांग्रेस का मुख्य तर्क यह है कि सरकार का नया फॉर्मूला राज्यों के बीच वर्तमान तुलनात्मक संख्याबल को बिगाड़ देगा। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि परिसीमन को केवल जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक रूप से लागू किया गया, तो यह उन राज्यों के लिए सजा जैसा होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है।

जयराम रमेश ने उत्तर प्रदेश और केरल के उदाहरण से इस खतरे को समझाया। उन्होंने बताया कि नए फॉर्मूले के तहत उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं। केरल की सीटें 20 से बढ़कर केवल 30 होंगी। इससे दोनों राज्यों के बीच सीटों का वर्तमान अंतर 60 से बढ़कर 90 हो जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि इससे न केवल दक्षिण भारतीय राज्य, बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों की राजनीतिक ताकत उत्तर भारत के अधिक आबादी वाले राज्यों की तुलना में काफी कम हो जाएगी।

जयराम रमेश ने चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे आचार संहिता का उल्लंघन और पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के चुनावों को प्रभावित करने की एक राजनीतिक चाल बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने 26 मार्च को पत्र लिखकर 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर एकतरफा निर्णय लिया।

रजिस्ट्रार जनरल के हालिया बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि डिजिटल जनगणना के कारण अधिकांश आंकड़े 2027 तक ही उपलब्ध हो पाएंगे। ऐसे में सरकार द्वारा जल्दबाजी में परिसीमन थोपना संदेहास्पद है। कांग्रेस की मांग है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर थोपने के बजाय राष्ट्रीय आम सहमति बनाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो।