बदल जाएगा भारतीय चुनाव का पूरा परिदृश्य ही
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कुल 815 सीटें करने का प्रस्ताव
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महिला आरक्षण का नया समीकरण
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जनगणना के बाद ही लागू किया जाएगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्र सरकार आगामी 2029 के आम चुनावों को लेकर एक ऐतिहासिक प्रशासनिक और संवैधानिक बदलाव की तैयारी कर रही है। सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार, सरकार नारी वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को समय पर लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या में भारी वृद्धि कर सकती है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जो मौजूदा क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
इस व्यापक बदलाव का मुख्य उद्देश्य 2029 के चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है। पूर्व में पारित कानून के अनुसार, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर लागू होना था। हालांकि, जनगणना और उसके बाद की जटिल प्रक्रिया में होने वाली संभावित देरी को देखते हुए, सरकार अब नारी वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक लाने पर विचार कर रही है। इस नए विधेयक के जरिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आधार मानकर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि 2029 तक हर हाल में महिला आरक्षण जमीन पर उतर सके।
प्रस्तावित बदलावों के तहत उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में सीटों की संख्या में सर्वाधिक उछाल देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 और महाराष्ट्र की 48 से बढ़कर 72 होने की संभावना है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल (63), बिहार (60), मध्य प्रदेश (44), राजस्थान (38) और गुजरात (39) में भी महत्वपूर्ण वृद्धि प्रस्तावित है। मध्यम और छोटे राज्यों की स्थिति भी मजबूत होगी। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59, कर्नाटक की 42 और आंध्र प्रदेश की 38 हो सकती हैं। केरल और तेलंगाना में भी क्रमशः 30 और 26 सीटों का प्रस्ताव है।
उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में सीटों की संख्या 5 से बढ़कर 8 होने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 6 तक पहुंच सकता है। अरुणाचल, सिक्किम, मिजोरम सहित अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी सीटों में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 से बढ़कर 70 करने का विचार है।
सीटों के इस नए गणित को लेकर दक्षिणी राज्यों में कुछ चिंताएं भी हैं, क्योंकि वहां जनसंख्या नियंत्रण के सफल कार्यान्वयन के कारण सीटों के अनुपात को लेकर संशय बना रहता है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का दावा है कि परिसीमन इस तरह किया जाएगा कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कमजोर न हो। इस बड़े संवैधानिक संशोधन के लिए सरकार एनडीए के सहयोगियों और विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनाने की कोशिश में जुटी है।