Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Dining Table Vastu Tips: डाइनिंग टेबल पर भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें; घर में आती है दरिद्रता और आर्थि... South Star Rumoured Breakup: डेटिंग की खबरों के बीच धनुष और मृणाल ठाकुर के अलग होने की चर्चा; जानिए ... US-Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की बड़ी बैठक; 60 दिनों में स्थायी शांति समझौते की ... NEET Re-Exam 2026: NTA की बड़ी तकनीकी चूक; नागपुर के छात्र को आवंटित कर दिया अबू धाबी का परीक्षा केंद... प्लाज्मा तकनीक से भविष्य के कंप्यूटर और तेज चलेंगे मणिपुर के चुराचांदपुर अस्पताल में बवाल आग लगाने की कोशिश केवल दाऊद इब्राहिम का शामिल होना बाकी है: संजय सिंह आज नेता प्रतिपक्ष को जन्मदिन की बधाई दी दिपके ने मोदी से छात्रों की आत्महत्या पर मुआवजा मांगा नासिक में विधान परिषद के चुनाव में नया राष्ट्रीय रिकार्ड

मौजूदा मुस्लिम विवाह पंजीकरण कानून निरस्त किया जाएगा

लिव इन रिलेशनशिप का भी पंजीकरण अनिवार्य

  • नियमों में उल्लंघन पर दंड का प्रावधान

  • गैर पंजीकरण और झूठी घोषणाओं में दंड

  • मुस्लिम संगठनों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम सरकार ने राज्य विधानसभा के 16वें सत्र के तीसरे दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) असम, 2026 विधेयक पेश किया है। इसके साथ ही गुजरात, गोवा और उत्तराखंड के बाद असम देश का चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है, जिसने इस दिशा में कदम उठाया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य के सभी निवासियों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने वाला एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। हालांकि, यह कानून असम की अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा।

विधेयक के तहत एकविवाह को अनिवार्य बनाते हुए विवाह की कानूनी उम्र पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है। यह कानून वैदिक, निकाह, आनंद करज आदि सभी धार्मिक रीति-रिवाजों से विवाह की अनुमति देता है, लेकिन धोखाधड़ी रोकने के लिए विवाह और तलाक का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी आमतौर पर मां के पास रहेगी। निर्वसीयत संपत्ति के मामलों में वर्ग-1 के उत्तराधिकारियों (जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता) के लिए लिंग-तटस्थ और समान अधिकार तय किए गए हैं। साथ ही, वयस्कों को वसीयत लिखने का अधिकार दिया गया है।

लिव-इन संबंधों का एक महीने के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा। ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चों को पूर्ण कानूनी मान्यता मिलेगी और पीड़ित साथी कोर्ट के माध्यम से भरण-पोषण का दावा कर सकेगा। नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड तय किए गए हैं। बहुविवाह करने पर 7 साल, बाल विवाह करने पर 2 साल, और पंजीकरण के समय जाली दस्तावेज देने या लिव-इन का पंजीकरण न कराने पर 3 महीने तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, नागरिक कानून के पुनर्गठन के तहत असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 2024 को निरस्त करने का प्रस्ताव है, लेकिन कानून लागू होने से पहले हो चुके बहुविवाह सुरक्षित रहेंगे।

विधेयक पेश होने के बाद से ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन जैसे मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के खिलाफ और बैकडोर से मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने की चाल बताया है। ओवैसी ने यह भी तर्क दिया कि जनजातीय समुदायों को इससे बाहर रखना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है और वसीयतनामा कानून के जरिए बेटियों को संपत्ति के अधिकार से वंचित किया जा सकेगा, जो महिलाओं के लिए न्यायपूर्ण नहीं है।