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समान नागरिक संहिता से आदिवासी प्रभावित नहीः अमित शाह

लाल किला मैदान में देश भर से जुटे संघ के आदिवासी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) से आदिवासियों पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने आदिवासी समुदाय से अपील की कि वे इस मुद्दे पर फैलाए जा रहे षड्यंत्रों और भ्रामक जानकारियों के बहकावे में न आएं। लाल किला मैदान में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि यूसीसी लागू करने वाले भाजपा शासित राज्यों में आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

शाह ने कहा, अब एक ऐसा षड्यंत्र शुरू किया गया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि समान नागरिक संहिता आदिवासी समुदायों को उनकी संस्कृति, परंपराओं और उनके रीति-रिवाजों के अनुसार जीने के अधिकार से वंचित कर देगी।

उन्होंने आगे कहा, आज इस मंच से, नरेंद्र मोदी सरकार में गृह मंत्री के रूप में, मैं यह बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं कि यूसीसी का कोई भी प्रावधान आदिवासी समुदायों या वनवासी समाज पर थोपा नहीं जाएगा।

शाह ने कहा कि जहां भी (राज्यों में) भाजपा सरकारों ने यूसीसी लागू किया है, वहां नरेंद्र मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी आदिवासी समुदाय इसके दायरे से बाहर रहें। गृह मंत्री ने आदिवासी समुदायों से प्रस्तावित कानून से न डरने का आग्रह किया और लोगों से गांवों तथा वन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने की अपील की। जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में शाह ने कहा, भ्रम फैलाने वाले हर व्यक्ति को मैं बताना चाहता हूं कि यूसीसी किसी भी आदिवासी या वनवासी भाई या बहन की परंपराओं और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

नक्सलवाद का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने पांच दशक पुराने इस दंश को खत्म कर दिया है और आज देश नक्सल समस्या से पूरी तरह मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। गृह मंत्री ने आदिवासी क्षेत्रों में धार्मिक धर्मांतरण पर भी बात की और कहा कि किसी को भी किसी अन्य व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं है। मोदी सरकार ने इस समुदाय के बजट में काफी बढ़ोतरी की है। शाह ने कहा, पहले आदिवासी कल्याण का कुल बजट केवल 28,000 करोड़ रुपये था। नरेंद्र मोदी जी ने इसे बढ़ाकर 1.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया। उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू के चुनाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसने सर्वोच्च संवैधानिक स्तर पर आदिवासी समाज को सम्मान और प्रतिनिधित्व दिया है। शाह ने इस समागम को आदिवासी समाज का महाकुंभ बताया और कहा कि आदिवासी परंपराओं की रक्षा का यह आंदोलन भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद पहला सबसे बड़ा आदिवासी आंदोलन है।