अपने खनन पट्टों से आमदनी और रोजगार सृजन
एक कोल ब्लॉक मिल चुका है
तीन अन्य पर दावेदारी की है
अन्य खनिजों पर भी दावेदारी होगी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः झारखंड अपने प्रचुर अयस्कों और प्राकृतिक संसाधनों के बल पर एक समृद्ध व विकसित राज्य बनने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। इसी रणनीति के तहत, राज्य सरकार के अधीन कार्यरत झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जेईएमसीएल) अब राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर अन्य निजी और सार्वजनिक कंपनियों की तरह खनन पट्टों के लिए नीलामी प्रक्रिया में सीधी दावेदारी पेश कर रही है।
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निगम ने कई बड़ी निजी कंपनियों को पछाड़ते हुए गोड्डा जिले के एक महत्वपूर्ण कोल ब्लॉक का खनन अधिकार सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। इसके अतिरिक्त, निगम ने राज्य के तीन अन्य प्रमुख कोल ब्लॉकों के लिए भी आधिकारिक तौर पर अपनी बोलियां जमा की हैं। जाहिर है कि यदि इन सभी चार कोल ब्लॉकों में खनन कार्य शुरू होता है, तो राज्य की इस सरकारी कंपनी को वाणिज्यिक स्तर पर निजी खनन कंपनियों की भांति बड़ा आर्थिक मुनाफा होगा। साथ ही, इन नई खनन परियोजनाओं के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर हजारों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी अब सिर्फ कोयले तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राज्य में पाए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर आदि) के खनन के लिए भी अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर जरूरी दस्तावेजीकरण और मैपिंग का काम तेजी से चल रहा है। निगम द्वारा राज्य के कोने-कोने में मौजूद तमाम खनिज संभावनाओं को परखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह नई कार्ययोजना पड़ोसी राज्य ओडिशा की ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों की सरकारी खनन कंपनियों की कार्यशैली से प्रेरित होकर बनाई गई है, जिन्होंने अपने राज्यों के आर्थिक विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। सरकार की नीति स्पष्ट है कि प्राकृतिक खनिजों से होने वाला मुनाफा केवल निजी कंपनियों की जेबों में जाने के बजाय सीधे राज्य के खजाने (राजस्व) में आए, जिससे राज्य के विकास और लोक कल्याणकारी योजनाओं को मजबूती मिले।
फिलहाल, इन सभी परियोजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। राज्य का खनन एवं भूतत्व विभाग इसके लिए एक विधिवत और पारदर्शी कार्ययोजना बना रहा है। सरकार के उच्च स्तर से अंतिम निर्णय होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि निगम इन आबंटित खनन क्षेत्रों में स्वयं उत्खनन का कार्य करेगा या किसी अनुभवी व्यावसायिक साझेदार (एमडीओ) के सहयोग से योजना को पूरा करेगा। इसके बावजूद, यह पूरी तरह तय है कि इन दूरदर्शी पहलों से झारखंड में रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए द्वार खुलेंगे।