Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
मध्य प्रदेश में 'ई-प्रवेश' प्रणाली ने बनाया रिकॉर्ड: डॉ. मोहन यादव के विजन से 4.89 लाख छात्रों ने लि... जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता “मेरा बेटा राह भर तड़पता रहा...”, मंडला में 108 एंबुलेंस की घोर लापरवाही से 21 साल के युवक की तड़पकर... उज्जैन बनेगी देश की पहली 'सर्प मित्र नगरी': 15 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्नेक पार्क, जानें खूबि... नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अगले 5 सालों के लिए बढ़ी 'पीएम-किसान' योजना, ₹3.15 लाख करोड़ के बजट को म... भारत में गूगल ने लॉन्च किया Gemini Spark AI एजेंट! आपके बिना ऑनलाइन रहे भी करेगा सारे काम, जानें खास... सावन में करें श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ: दूर होंगे सभी कष्ट, जानें श्रीराम से जुड़ी कथा, सही स... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु...

डीके शिवकुमार के पक्ष में हैं प्रियंका गांधी

कर्नाटक का सीएम की कुर्सी का विवाद दिल्ली दरबार में

  • वरिष्ठ नेताओं की सभी के साथ बैठक

  • परिस्थिति का आकलन किया जा रहा है

  • उम्र के मामले में शिवकुमार को बढ़त है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर चल रहा सिंहासन का खेल यानी मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच का विवाद दो साल से अधिक समय के बाद अब समाप्त हो सकता है। सूत्रों के संकेत बताते हैं कि इस अंत को जल्द लाने में प्रियंका गांधी वाड्रा सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं और वे राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए दबाव बना रही हैं।

मंगलवार दोपहर को वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं—मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल—ने इस नेतृत्व विवाद को सुलझाने के लिए सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग और संयुक्त रूप से घंटों बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करना था जिसके तहत सिद्धारमैया को सम्मानजनक विदाई (शायद राज्यसभा सीट के साथ) दी जा सके और उनकी जगह डीके शिवकुमार को कमान सौंपी जा सके, ताकि वे 2028 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की कमान संभाल सकें।

कांग्रेस आलाकमान पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर आश्वस्त है कि कर्नाटक में सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने के लिए नेतृत्व बदलना जरूरी है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस के बढ़ते कदम को न रोक सके। इसी उद्देश्य से, चारों वरिष्ठ नेताओं ने कथित तौर पर सिद्धारमैया को पद छोड़ने और शिवकुमार को कमान सौंपने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अब तक पार्टी इस फैसले को लेकर इसलिए सतर्क थी क्योंकि सिद्धारमैया के पास अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) का एक मजबूत वोट बैंक है, जो उन्हें एक जननेता का दर्जा देता है। पार्टी चुनावों से ठीक पहले इस बड़े वोट बैंक को नाराज करने से हिचक रही थी। पिछले चुनाव में इसी अहिंदा समर्थन के दम पर कांग्रेस राज्य के पारंपरिक वोक्कालिगा-लिंगायत जातिगत समीकरणों को भेदने में सफल रही थी।

सिद्धारमैया की उम्र (वे 2028 में 80 वर्ष के हो जाएंगे) के अलावा, उनके शासन के रिकॉर्ड को भी कमजोर माना जा रहा है। यही वजह है कि उनके द्वारा मांगी गई कैबिनेट फेरबदल की अनुमति अब तक नहीं मिल पाई है।

दूसरी ओर, डीके शिवकुमार इस समय उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। ये दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण पद हैं, जो सामान्यतः राहुल गांधी के एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत के तहत किसी एक व्यक्ति को नहीं दिए जाते। लेकिन इसके बावजूद शिवकुमार का इन दोनों पदों पर बने रहना कांग्रेस आलाकमान के लिए उनकी सांगठनिक उपयोगिता और महत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण है।