पाकिस्तान के कोयला खदान परिसर में विस्फोट
क्वेटाः पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में गुरुवार को हुई एक भीषण दुर्घटना ने खनन उद्योग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रांत की राजधानी क्वेटा से सटे सोरंज के दूरदराज और दुर्गम इलाके में स्थित एक कोयला खदान परिसर में अचानक हुए एक जोरदार विस्फोट ने वहां काम कर रहे श्रमिकों के लिए काल का ग्रास बना दिया। बलूचिस्तान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हृदयविदारक हादसे में अब तक कम से कम 32 कोयला खनिकों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है।
विस्फोट का मुख्य कारण खदान के भीतर अत्यधिक मात्रा में मिथेन गैस का रिसाव और उसका संचय बताया जा रहा है। गैस के दबाव से हुआ यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि खदान का एक विशाल हिस्सा देखते ही देखते भरभरा कर ढह गया। बलूचिस्तान के खान एवं खनिज विकास मंत्री शोएब नोशेरवानी ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस समय यह त्रासदी हुई, खदान के उस विशिष्ट हिस्से में कुल 36 श्रमिक काम में जुटे थे।
हादसे के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। वर्तमान में 14 अन्य खनिकों की तलाश जारी है, जो मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। प्रांत के मुख्य खान निरीक्षक मुहम्मद आतिफ के नेतृत्व में यह राहत कार्य जमीन की सतह से लगभग 4,000 फीट (1,219 मीटर) की गहराई पर चलाया जा रहा है। हालांकि, इतने गहरे मलबे में फंसे लोगों के जीवित बचने की संभावनाएं समय बीतने के साथ बेहद क्षीण होती जा रही हैं, जिससे परिजनों का दुख और गहरा गया है।
विस्फोट की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी चपेट में आकर आसपास की दो अन्य खदानें भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। बलूचिस्तान के खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का लगातार अभाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुराने तरीके, वेंटिलेशन की कमी और सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी के कारण यहां अक्सर गैस रिसाव या खदान ढहने की घटनाएं होती रहती हैं। फिलहाल, पूरा प्रशासनिक तंत्र और बचाव दल प्रतिकूल परिस्थितियों में भी फंसे हुए श्रमिकों को निकालने की कोशिशों में जुटा है। यह दुर्घटना न केवल एक बड़ा मानवीय संकट है, बल्कि यह खनन उद्योग में काम करने वाले हजारों श्रमिकों की असुरक्षित कार्य-दशाओं पर एक तल्ख टिप्पणी भी है।