मौसम बदला तो अचानक बदल गये रूसी सेना के तेवर
कीवः पूर्वी यूक्रेन के रणक्षेत्र से आ रही ताजा सैन्य रिपोर्टों और स्वतंत्र विश्लेषकों के अनुसार, रूसी सेना ने डोनबास क्षेत्र में एक बड़ा बसंत सैन्य अभियानशुरू कर दिया है। यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रूस ने इस हमले में भारी मात्रा में सैन्य शक्ति का झोंका है, जिसमें दर्जनों आधुनिक टैंक और बख्तरबंद वाहनों के काफिले शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में हो रहे बदलावों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
सैन्य मोर्चे की स्थिति और लिमान का महत्व: रूस के इस ताजा हमले का मुख्य केंद्र डोनेट्स्क क्षेत्र का लिमान शहर बना हुआ है। लिमान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यूक्रेन के किलेबंदी बेल्ट के मुहाने पर स्थित है। यह शहर स्लोविंस्क जैसे बड़े और महत्वपूर्ण शहरों की रक्षा करने वाली एक प्रमुख अग्रिम चौकी के रूप में कार्य करता है। यूक्रेनी सेना की थर्ड कोर के अनुसार, शनिवार को रूसी सेना ने इस क्षेत्र में लगभग 30 बख्तरबंद वाहनों और 500 से अधिक पैदल सैनिकों के साथ धावा बोला। ब्रिगेडियर जनरल एंड्री बिलेट्सकी ने बताया कि रूसी सेना ने सभी मोर्चों पर भारी गोलाबारी की, हालांकि उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी रक्षा पंक्ति ने फिलहाल इन हमलों को विफल कर दिया है।
इस सैन्य संकट के बीच, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़े युद्ध की स्थिति, यूक्रेन के लिए बहुत बुरा संकेत है। ज़ेलेंस्की का मानना है कि विश्व का ध्यान यूक्रेन से हटकर मध्य पूर्व की ओर केंद्रित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई महत्वपूर्ण राजनयिक और त्रिपक्षीय बैठकें लगातार स्थगित की जा रही हैं, जिसका सीधा कारण ईरान में युद्ध की स्थिति है। यूक्रेन को डर है कि यदि पश्चिमी देशों की सैन्य सहायता और कूटनीतिक ध्यान मध्य पूर्व की ओर मुड़ गया, तो रूस को पूर्वी मोर्चे पर निर्णायक बढ़त मिल सकती है।
वर्तमान में, यूक्रेन के लिए चुनौती दोहरी है: एक तरफ उसे रूसी टैंकों के भौतिक हमले को रोकना है, तो दूसरी तरफ वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता और सैन्य सहायता की निरंतरता को बनाए रखना है। लिमान और स्लोविंस्क की रक्षा अब न केवल यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के लिए, बल्कि उसके मनोबल के लिए भी अनिवार्य हो गई है।