लेबनान की सरकार का हिजबुल्लाह पर भी नियंत्रण नहीं
बेरूतः रविवार, 22 मार्च 2026 को इजरायली सेना ने दक्षिण लेबनान को देश के शेष हिस्सों से जोड़ने वाले एक मुख्य पुल को हवाई हमले में पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई इजरायल के उस नए सैन्य आदेश के बाद आई है, जिसमें लेबनान की रणनीतिक लितानी नदी पर बने सभी क्रॉसिंग को नष्ट करने और दक्षिणी सीमा के पास स्थित घरों को ढहाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलों और नागरिक बुनियादी ढांचों का यह विनाश इजरायल के सैन्य अभियान में एक बड़े उछाल का संकेत है, जो 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा इजरायली क्षेत्र में की गई गोलाबारी के बाद शुरू हुआ था।
रविवार को हुआ यह हमला लेबनान के तटीय राजमार्ग पर स्थित एक प्रमुख क्रॉसिंग पर किया गया, जो कृषि भूमि के बीच से गुजरता था और दक्षिणी व मध्य लेबनान के बीच संपर्क का मुख्य मार्ग था। हमले से पहले इजरायली सेना ने चेतावनी जारी की थी, जिसके बाद स्थानीय निवासी लामा अल-फारेस जैसे कई परिवारों को अपनी मेहनत से बनाए घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय कानून सामान्यतः नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमलों को प्रतिबंधित करते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने भी इजरायल की इन कार्रवाइयों और बड़े पैमाने पर निकासी के आदेशों की कड़ी आलोचना की है।
इस संघर्ष में अब तक मानवीय क्षति का आंकड़ा डरावना है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें लगभग 120 बच्चे और 80 महिलाएं शामिल हैं। वहीं, रविवार को लेबनानी क्षेत्र से हुई गोलाबारी में एक इजरायली नागरिक की भी मौत हो गई, जो इस मौजूदा युद्ध में लेबनान की ओर से हुई पहली इजरायली नागरिक मृत्यु है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने स्पष्ट किया है कि सेना को लितानी नदी पर उन सभी पुलों को नष्ट करने का आदेश दिया गया है जिनका उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है, ताकि हिजबुल्लाह के लड़ाकों और हथियारों की आवाजाही को रोका जा सके।
इजरायल का तर्क है कि ये कदम उसकी सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं, जबकि लेबनान इसे अपनी संप्रभुता और नागरिक जीवन पर सीधा प्रहार मान रहा है। जैसे-जैसे सीमा पर घरों और पुलों का मलबा बढ़ रहा है, क्षेत्र में शांति की संभावनाएं और भी क्षीण होती जा रही हैं।