छह राज्य, छह हुंकार अभियान की तैयारी जारी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर सड़क से संसद तक के संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते को किसान विरोधी करार देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ यह समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए आत्मसमर्पण जैसा है। इस मुद्दे को धार देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने छह रणनीतिक राज्यों—जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र—में बड़े पैमाने पर किसान सम्मेलन आयोजित करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की है।
कांग्रेस का मुख्य तर्क यह है कि इस व्यापार समझौते से विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे, जिससे घरेलू किसानों को भारी नुकसान होगा। राहुल गांधी ने विशेष रूप से कपास, सोयाबीन, मक्का और बागवानी (फल-मेवा) से जुड़े किसानों के लिए खतरे की घंटी बजाई है।
पार्टी का कहना है कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे उनके उत्पाद वैश्विक बाजार में सस्ते होते हैं। इसके विपरीत, भारतीय किसानों को उस स्तर की सरकारी मदद नहीं मिलती। ऐसे में आयात शुल्क में छूट और खुले बाजार की नीति से विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे स्थानीय फसलों की कीमतें गिरेंगी और अंततः किसानों की आय में भारी गिरावट आएगी।
कांग्रेस ने जिन राज्यों को इस अभियान के लिए चुना है, वे भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश: यहाँ सोयाबीन और कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है। राजस्थान: कपास और सरसों के किसानों का यह प्रमुख केंद्र है। बिहार: यहाँ मक्का और बागवानी फसलों की प्रधानता है। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर: इन राज्यों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से सेब और सूखे मेवों पर टिकी है।
पार्टी ने अपने कार्यक्रमों की तारीखें भी तय कर दी हैं। 24 फरवरी को भोपाल में, 7 मार्च को यवतमाल (महाराष्ट्र) में और 9 मार्च को श्रीगंगानगर (राजस्थान) में विशाल सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति यह दर्शाती है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगामी चुनावों में मुख्य एजेंडा बनाने की तैयारी में है।
राहुल गांधी लगातार विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। कांग्रेस की रणनीति 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन की सफलता को दोहराने की है। पार्टी का मानना है कि जब राजनीतिक दल और स्वतंत्र किसान संगठन एक मंच पर आते हैं, तो मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन जाता है। हालांकि, रणनीतिकारों का यह भी मानना है कि आंदोलन की कमान किसानों के हाथ में ही रहनी चाहिए ताकि इसकी विश्वसनीयता बनी रहे।