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शीर्ष अदालत ने सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी

एनसीईआरटी किताब के विवाद पर केंद्र सरकार बैकफुट पर

  • आठवी कक्षा की किताब में यह उल्लेख

  • मुख्य न्यायाधीश ने तीखी प्रतिक्रिया दी

  • वरिष्ठ वकीलों द्वारा चर्चा का विरोध

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः एनसीईआरटी की कक्षा 8वीं की पाठ्यपुस्तकों से न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार के संदर्भ को हटा दिया जाएगा। उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह खंड नहीं लिखा जाना चाहिए था। सूत्रों का कहना है कि ऐसी बातों को उजागर करना उचित नहीं है और इसके बजाय प्रेरणादायक चीजें लिखी जानी चाहिए थीं। यह विवाद तब गहराया जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जोर देकर कहा कि अदालत किसी को भी संस्थान को बदनाम करने की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने इस मामले का संज्ञान लिया है और स्वतः संज्ञान कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं। दरअसल, पुस्तक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के जुलाई 2025 के एक बयान को उद्धृत किया गया था, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों पर चिंता जताई थी।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश को इस तरह उद्धृत करना सही नहीं है। इससे पहले वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि कक्षा 8 के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाना गंभीर चिंता का विषय है। सिब्बल ने सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाया कि क्या राजनेताओं, मंत्रियों और जांच एजेंसियों के भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर दिया जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए इसे सूचना का चयनात्मक चयन करार दिया। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही कानून मंत्रालय ने खुलासा किया था कि 2016 से 2025 के बीच उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के खिलाफ 7,528 शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

संशोधित अध्याय हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका में अदालतों के पदानुक्रम और न्याय तक पहुंच के अलावा भ्रष्टाचार और लंबित मामलों जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया था। इसमें यह भी बताया गया था कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, अब सरकार ने इस विवादास्पद हिस्से को हटाने का मन बना लिया है।