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पाक अधिकृत कश्मीर में फिर सेना ने फायरिंग कर दी

निहत्थे लोगों पर गोली चलने से छह की मौत

एजेंसियां

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक बार फिर हिंसक झड़पें तेज हो गई हैं। रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों के खिलाफ की गई दमनकारी कार्रवाई के बाद, शहर के नए बस टर्मिनल के पास भड़की हिंसा में सुरक्षा बलों की फायरिंग से छह आम नागरिक मारे गए हैं। बलूच सधुनाटी जिले में मारे गए नागरिकों में जाहिद मुगल, जफर मुगल और अर्सलान अकबर शामिल हैं। इसके अलावा रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल पर वाजिद हयात नाम के नागरिक की जान चली गई। इस ताजा रक्तपात के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और इस्लामाबाद शासन के खिलाफ स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

इस घटना से ठीक एक दिन पहले, अमेरिका में रहने वाले पीओके समुदाय के लगभग 100 लोगों ने वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने वहां बिगड़ते मानवीय संकट की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की थी कि पाकिस्तानी सेना को नागरिक इलाकों से तुरंत हटाया जाए। उन्होंने क्षेत्र में महीनों से जारी इंटरनेट शटडाउन का मुद्दा भी उठाया, जिसने लगभग 40 लाख आबादी को बाहरी दुनिया से काट दिया है। स्थानीय लोगों ने भारत से इस संकट में हस्तक्षेप करने और मानवीय राहत पहुंचाने की भी गुहार लगाई है, साथ ही पुंछ और डोडा सेक्टरों के रास्ते नियंत्रण रेखा को खोलने की मांग की है।

प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद यह क्षेत्र गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वर्ष 2025 में नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यहां की 66 फीसद आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है, लेकिन 57 फीसद से अधिक परिवार गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान वॉलंटरी नेशनल रिव्यू की रिपोर्ट बताती है कि इस क्षेत्र में 5 वर्ष से कम उम्र के 39 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के कारण अविकसित रह गए हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को बयान जारी कर इन झड़पों को पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे व्यवस्थित शोषण का नतीजा बताया। उन्होंने कहा, पीओके में चल रहे प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों पुराने प्रशासनिक उत्पीड़न और मौलिक अधिकारों के हनन का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। जायसवाल ने आगे कहा कि जायज मांगों को सुनने के बजाय पाकिस्तानी हुकूमत महिलाओं और बच्चों पर पुलिस बर्बरता कर रही है, इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर रही है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोक रही है। भारत ने वैश्विक समुदाय से नागरिकों पर हो रहे इस अत्याचार के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है।