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मध्य पूर्व के दौरे के पहले चरण में इजरायल पहुंचे पीएम

वहां की संसद नेसेट को भी संबोधित करेंगे मोदी

  • मध्यपूर्व की भारतीय कूटनीति पर नजर

  • वहां के राष्ट्रपति हर्जोग से भी बैठक होगी

  • 1971 में पहली बार मोदी वहां गये थे

जेरूशलमः भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर इजराइल पहुंचे हैं। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से यह उनकी पहली इजराइल यात्रा है। इस यात्रा के दौरान मोदी का इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तथा राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ बैठकें करने का कार्यक्रम है।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार में अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। पिछले एक दशक में मोदी के सत्ता में आने के बाद से इन संबंधों में काफी प्रगाढ़ता आई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा भारत की विदेश नीति की भी परीक्षा लेगी, क्योंकि उसे इजराइल और अन्य मध्य पूर्वी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना है।

वर्ष 2017 में मोदी इजराइल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक टर्निंग पॉइंट माना गया था। दोनों देश आतंकवाद विरोधी अभियानों और रक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करते हैं और भारत इजरायली हथियारों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए एक्स पर लिखा कि इजराइल और भारत का बंधन दो वैश्विक नेताओं के बीच एक शक्तिशाली गठबंधन है। मोदी ने भी जवाब में कहा कि भारत इजराइल के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को बहुत महत्व देता है, जो विश्वास और नवाचार पर आधारित है।

क्षेत्रीय तनाव भी इस यात्रा की पृष्ठभूमि में है, विशेष रूप से ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की धमकियों के बीच। हालांकि, जानकारों का कहना है कि मोदी का ध्यान द्विपक्षीय संबंधों पर रहेगा और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा संभवतः गुप्त रखी जाएगी। भारत के ईरान और अन्य अरब देशों के साथ भी मजबूत संबंध हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के कबीर तनेजा के अनुसार, भारत का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्षों को क्षेत्र के देशों को ही सुलझाना चाहिए।

भारत में विपक्ष ने इस यात्रा की आलोचना की है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने सरकार पर फिलिस्तीनी मुद्दे को छोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं इजराइल में भी विपक्षी दलों ने न्यायिक सुधारों के विवाद के कारण मोदी के नेसेट संबोधन के बहिष्कार की धमकी दी है। इन सबके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए भारत के लिए इजराइल की उन्नत रक्षा तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो इस यात्रा के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।