बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की विधि व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। डीजीपी विनय कुमार के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए सरकार ने अब प्रशासनिक इकाइयों में बदलाव करते हुए रेंज की बजाय जोन में एडीजी (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक) रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की तैनाती का फैसला किया है।
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सूत्रों के अनुसार, बिहार सरकार का यह कदम पुलिस व्यवस्था में सुधार और अपराध पर लगाम कसने के उद्देश्य से उठाया गया है। एडीजी रैंक के अधिकारी फील्ड में तैनात होने से न सिर्फ अपराध नियंत्रण बेहतर होगा बल्कि आपराधिक मामलों के अनुसंधान और निपटारे में भी तेजी आएगी।
यह निर्णय खासकर कुछ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों, जिनमें डीआईजी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं, के खिलाफ भ्रष्टाचार और कार्यशैली को लेकर सरकार तक पहुंची शिकायतों के मद्देनजर लिया गया है। एडीजी स्तर के अधिकारी निचले स्तर के अधिकारियों पर बेहतर नियंत्रण रख पाएंगे, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
राज्य की बढ़ती जनसंख्या, सोशल मीडिया और साइबर अपराध जैसी आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी यह कदम सहायक माना जा रहा है। एडीजी रैंक के अधिकारी इन जटिल समस्याओं से निपटने में अधिक सक्षम होंगे। साथ ही, वे आम जनता की शिकायतों को तुरंत सुनकर उन पर कार्रवाई सुनिश्चित कर सकते हैं, जिससे लोगों को त्वरित न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों के भीतर ही इन एडीजी अधिकारियों की तैनाती शुरू हो जाएगी। आने वाले कुछ महीनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे देखते हुए भी यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पुलिस व्यवस्था और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी, जिससे बिहार की जनता को बड़ी राहत मिलेगी।