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नक्सलियों के प्रस्ताव पर साय सरकार वार्ता को राजी

सुरक्षाबलों की निरंतर घेराबंदी का अब दुर्गम जंगली इलाकों पर असर

  • रुपेश की ओर से जारी हुआ प्रेस नोट

  • डिप्टी सीएम ने प्रस्ताव पर सहमति दी

  • हथियार छोड़कर बात चीत अपनाना होगा

रायपुरः छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण गतिविधि में एक ओर प्रतिबंधित नक्सली संगठन ने एक बार फिर राज्य सरकार के सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है।

नक्सलियों के उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रुपेश की ओर से जारी प्रेस नोट पर गुरुवार को अपने निवास कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है, विजय शर्मा ने कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, सरकार के पास नक्सलियों के पुनर्वास के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी नीति है। साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़कर सामने आएं और बातचीत का रास्ता अपनाएं। श्री शर्मा ने कहा,  अगर कोई एक व्यक्ति भी बातचीत के लिए तैयार है तो सरकार भी तैयार है। चाहे वह छोटा समूह हो या बड़ा, सरकार हर स्तर पर चर्चा के लिए तत्पर है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में की जा रही है। श्री शर्मा ने यह भी कहा कि बंदूक के जवाब में केवल चर्चा नहीं की जा सकती, जरूरत पड़ने पर सरकार कड़ी कार्रवाई भी करेगी। उन्होंने नक्सल संगठन की ओर से आया पत्र ‘सही और प्रामाणिक’ बताते हुए कहा कि इसमें सरकार से बातचीत की अपील की गई है। नक्सल संगठन ने इस नोट में स्पष्ट किया है कि वे पुलिस जवानों को अपना दुश्मन नहीं मानते और बार-बार पोस्टरों एवं पर्चों के माध्यम से इसी संदेश को दोहराया है।

प्रेस नोट में नक्सलियों ने कहा है,  हमें समझना होगा कि आपसी संघर्ष की स्थिति बनाई गई है। हम जनता और अपने कैडर को ही अपना मानते हैं, उन पर गोली न चलाई जाए। शांति वार्ता के हमारे प्रयास का समर्थन करें। श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रस्ताव पर सरकार का मानना है कि शांति वार्ता के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायित्व और विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।

गौरतलब है कि केंद्र व छत्तीसगढ़ सरकार के 31 मार्च तक नक्सल समस्या को समाप्त किए जाने के प्रयासों से माओवादियों ने एक बार फिर से शांति का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से रूपेश ने आठ अप्रैल की तारीख में सरकार से शांति वार्ता के लिए एक सशर्त प्रेस नोट जारी किया है। इस प्रेस नोट में नक्सली संगठन ने साफतौर पर लिखा है कि हम सरकार से शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अनुकूल वातावरण पहले बनना चाहिए। इस प्रेस नोट में कहा गया है कि शांति वार्ता के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई रुकनी चाहिए। वार्ता एकपक्षीय न होकर दोनों तरफ से होनी चाहिए।