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कांग्रेस के आरोप के बाद पहली बार चुनाव आयोग ने जानकारी दी

  • इससे संबंधित दस्तावेज भी बाहर आये

  • मशीनों को बदलने की चर्चा पत्र में है

  • आयोग ने पहले इस पर साधी थी चुप्पी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेडा के आरोप के बाद पहली बार चुनाव आयोग ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके वीवीपैट मशीनों में सुधार की जरूरत है। आयोग ने इन्हें खराब मानने से इंकार करते हुए कहा कि सिर्फ 3.4 लाख मशीनों को निवारक रखरखाव की जरूरत है।

वैसे कांग्रेस के आरोपों के बाद आयोग के वे दस्तावेज भी बाहर आ गये हैं, जिनमें कहा गया है कि 6.5 लाख वीवीपैट मशीनें ‘खराब’ हैं और मरम्मत के लिए निर्माता को भेजी जा रही हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, ये नवीनतम एम 3  पीढ़ी की मशीनें हैं जिनमें से 37 प्रतिशत दोषपूर्ण थीं। दोषों को सुधारने के लिए इन मशीनों को निर्माता को वापस भेजने की आवश्यकता है।

हालांकि, कुछ जगहों पर, ऐसा प्रतीत होता है कि खराब मशीनों को मरम्मत के बजाय नई मशीनों से बदला जा रहा है। एक राज्य में चुनाव आयोग के अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच हुए एक पत्र, स्पष्ट रूप से कहता है कि ये नई मशीनें हैं। वैसे चुनाव आयोग ने अब तक राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी थी, यह बड़ा सवाल खुद चुनाव आयोग के सामने खड़ा हो गया है।

दूसरी तरफ पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस स्थिति को गलत माना  है। उनके मुताबिक चुनाव आयोग का काम पूरी पारदर्शिता के साथ हर काम को अंजाम देने का है। इस बीच ईसीआई के सूत्रों ने कहा कि दोषपूर्ण वीवीपीएटी का मतलब है कि वे केवल चुनाव प्रक्रिया के दौरान काम करना बंद कर देते हैं।

यह गलत परिणाम नहीं देता है। चुनाव आयोग की सफाई के बाद भी आयोग के दस्तावेज यह बता रहे हैं कि दरअसल मशीनों को बदला जा रहा है। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद को भेजी जाने वाली मशीनों में कुछ खास सीरिज की मशीनों को दोषपूर्ण माना गया है।

इसी तरह बाकी श्रृंखलाएं भी हैं, अर्थात्, ईवीटीईबी, ईवीटीईसी, ईवीटीईडी, प्रत्येक में 99999 मशीनों का एक बैच शामिल है। ये एम3 मशीनें हैं जिन्हें पहली बार 2018 में पेश किया गया था और 2019 के चुनावों में भी इनका इस्तेमाल किया गया था।

इसे परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, 2019 के लोकसभा चुनावों में कुल 17.4 लाख वीवीपैट को लोकसभा चुनावों और साथ-साथ होने वाले विधानसभा चुनावों के उपयोग के लिए अधिसूचित किया गया था। इसका मतलब यह है कि इन मशीनों में से एक तिहाई (37 प्रतिशत) अब चुनाव आयोग द्वारा खराब पाई गई हैं। दूसरी तरफ इस मामले की जानकारी खुद चुनाव आयोग द्वारा नहीं दिये जाने की वजह से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया है।