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राबर्ट वाड्रा डील में कोई गड़बड़ी नहीं हुई

  • यह कभी चुनाव का मुद्दा बना था

  • ओमप्रकाश चौटाला भी निर्दोष साबित

  • हाई कोर्ट में बताया और जांच जारी है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः इसे कहते हैं खोदा पहाड़ तो निकली चूहिया वह भी मरी हुई। भाजपा ने जिस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाया था। इस मुद्दे पर इतनी बातें कही गयी कि जनता भी समझ रही थी कि रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए जमीन सौदे में व्यापक गड़बड़ी हुई है। अब हरियाण की सरकार ने इस पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

इस रिपोर्ट के जरिए अदालत को बताया गया है कि राजस्व अधिकारियों ने रॉबर्ट वाड्रा द्वारा भूमि के हस्तांतरण में उल्लंघन नहीं पाया है। इस मामले में गुरुग्राम में धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के लगभग पांच साल बाद ऐसी जानकारी सामने आयी है। अन्य बातों के अलावा, उच्च न्यायालय के समक्ष रखे गए एक हलफनामे में यह भी कहा गया है कि 18 अक्टूबर, 2005 को धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई थी।

भूमि हस्तांतरण मामले का उल्लेख करते हुए हलफनामे में कहा गया है कि तहसीलदार, मानेसर, गुरुग्राम द्वारा यह बताया गया था कि मैसर्स स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने 18 सितंबर, 2019 को मैसर्स डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को 3.5 एकड़ जमीन बेची थी। उक्त लेनदेन में किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।

तहसीलदार, वजीराबाद, गुरुग्राम से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि विचाराधीन भूमि मैसर्स डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड के नाम पर नहीं मिली है।  भूमि अभी भी एचएसवीपी/एचएसआईआईडीसी, हरियाणा के नाम पर मौजूद है। उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि आगे की जांच के लिए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। 22 मार्च को गठित एसआईटी में एक पुलिस उपायुक्त (डीसीपी), दो सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), एक निरीक्षक और एक एएसआई शामिल थे। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला पर जो आरोप लगाये गये थे, वे भी जांच में सही नहीं पाये गये हैं।