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अन्नामलाई ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया

  • तमिलनाडु की राजनीति में अब बड़ा उलटफेर होगा

  • अन्नाद्रमक की वजह से नाराजगी

  • काफी समय से साइड लाइन में थे

  • अब नई पार्टी बनाने का स्पष्ट संकेत

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने इस्तीफे के साथ ही पांच पन्नों का एक विस्तृत नोट भी सौंपा, जिसमें हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया है। बाद में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट की।

यह इस्तीफा लंबे समय से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ चल रहे मतभेदों का परिणाम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई एआईएडीएमके के साथ गठबंधन को फिर से जीवित करने के पार्टी के फैसले और विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण की प्रक्रिया से खुश नहीं थे। उनका मानना था कि भाजपा को गठबंधन के बजाय राज्य में अपना स्वतंत्र संगठनात्मक आधार मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

अन्नामलाई अब एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। उनके करीबी सहयोगियों के मुताबिक, इस नई पार्टी का दृष्टिकोण धर्मनिरपेक्ष और तमिल-प्रथम होगा। वे एक ऐसा मंच तैयार करना चाहते हैं जो तमिल पहचान को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ सके। इस प्रस्तावित दल के छह से आठ महीने के भीतर अस्तित्व में आने की संभावना है, जो राज्य में भाजपा और द्रविड़ पार्टियों के लिए एक तीसरे विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास करेगा।

अन्नामलाई की यह रणनीति इस बात पर आधारित है कि तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता विजय की पार्टी के उदय ने एक खाली जगह पैदा की है, जिसे नई राजनीतिक ताकतें भर सकती हैं। उन्हें उम्मीद है कि राज्य के युवा पेशेवर, पहली बार राजनीति में आने वाले लोग और अन्य दलों के अनुभवी नेता उनके साथ जुड़ेंगे। इस नई पारी की तैयारी के लिए वे या तो एक नया पंजीकरण कराएंगे या किसी मौजूदा पंजीकृत पार्टी को अधिग्रहित करेंगे। इससे पहले वे एक सामाजिक संगठन की भी शुरुआत कर सकते हैं।

हाल ही में सीबीएसई कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन-भाषा फार्मूले के केंद्र के निर्णय की आलोचना कर अन्नामलाई ने पहले ही अपने भविष्य के तेवर स्पष्ट कर दिए थे। अब देखना यह होगा कि उनका यह तमिल-प्रथम एजेंडा राज्य की द्रविड़ राजनीति के गढ़ में कितनी सेंध लगा पाता है।