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जेलबॉट शरीर के अंदर जरूरी हिस्से में दवा पहुंचायेगा

  • खून के अंदर खास लक्ष्य तक जाएगा

  • मरीज को इसके होने से कोई परेशानी नहीं

  • जरूरत के मुताबिक आकार भी बदल सकता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिकों ने एक नये किस्म का रोबोट तैयार करने में सफलता पायी है। इस रोबोट की विशेषता यह है कि यह ताप पर आधारित निर्देशों का पालन करता है और यह लचीले किस्म का अत्यंत क्षुद्र रोबोट है। इसे जेलबोट का नाम दिया गया है। इसकी उपयोगिता इंसानों के शरीर के अंदर किसी खास हिस्से तक दवा पहुंचाने में होगी।

इसी वजह से इसे चिकित्सा विज्ञान के लिहाज से क्रांतिकारी आविष्कार माना जा रहा है। अत्यंत सुक्ष्म आकार का यह रोबोट शरीर के अंदर की गर्मी से ऊर्जा हासिल करता है और वह इसके जरिए अपना काम खुद ही तय कर लेता है। इसकी मुख्य भूमिका इंसानी शरीर के किसी खास अंग तक दवा को पहुंचाने की होगी। इससे मरीज के खास हिस्से को दवा के सहारे राहत दिला पाना अब संभव होगा। इस रोबोट के बारे में साइंस रोबोटिक्स में विस्तार से जानकारी दी गयी है। जिस पर चिकित्सा वैज्ञानिकों की अधिक नजर है।

दरअसल यह लचीला और जिलेटिन से तैयार होने वाला रोबोट है। इसी वजह से उसे शरीर के अंदर रख पाना संभव होगा और आकार में छोटा होने की वजह से मरीज को इसके शरीर के अंदर होने के किसी किस्म की परेशानी भी नहीं होगी। इसे जमीन पर पाये जाने वाले केचुएं की तर्ज पर बनाया गया है।

जिस तरीके से केचुआं रेंगता हुआ आगे बढ़ता है ठीक उसी पद्धति से यह जेलबॉट भी अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचेगा। मजेदार बात यह है कि इसके अंदर किसी किस्म की कोई बैटरी भी नहीं होगी और उसे बाहरी ऊर्जा के मदद की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वह शरीर के अंदर से प्राप्त होने वाली गर्मी से ही अपना संकुचन करते हुए आगे बढ़ता जाएगा। आगे बढ़ने के लिए यह अपने शरीर को बड़ा कर लेगा और फिर पीछे की तरफ से सिकुड़ते हुए आगे की तरफ पहुंचता चला जाएगा। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के केमिकल एंड बॉयोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग के प्रोफसर डेविड ग्रासियस ने यह जानकारी दी है।

लचीला होने की वजह से उसे अपना काम करने में कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि वह अपने आकार को आवश्यकता के मुताबिक बदलता हुआ लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ेगा। इसे बनाने वालों ने स्पष्ट किया है कि इसे थर्मोरेसपांसिव हाईड्रोजेल की पद्धति पर बनाया गया है जो तीस से साठ डिग्री तापमान पर अपने अंदर ऐसा संकोचन और विस्तारण कर सकता है।

यह भी सॉफ्ट रोबोटिक्स का एक नया नमूना है। जिसकी इस्तेमाल चिकित्सा में ज्यादा होने वाला है। परीक्षण में यह पाया गया है कि यह जरूरत के मुताबिक आगे अथवा पीछे जा सकता है। इसके लिए उसे किसी बाहरी निर्देश की भी जरूरत नहीं पड़ती है। दूसरे किस्म के मैकानिकल रोबोट मजबूत पदार्थो से या प्लास्टिक आधारित होते हैं। ऐसे रोबोटों को सुक्ष्म स्तर पर बनाने के बाद भी चिकित्सा विज्ञान में खास तौर पर शरीर के अंदऱ उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यह जेलबॉट उस परेशानी को दूर करने में सक्षम होगा।

यह बताया गया है कि थ्री डी प्रिटिंग तकनीक के सहारे इन्हे तैयार किया गया है। इसलिए शोध दल यह भी मानता है कि ऐसे जेलबॉट का व्यापारिक उत्पादन भी आसानी से और बहुत कम लागत पर किया जा सकता है। यह इंसानी शरीर के अंदर तैरने वाले मेरिन रोबोट जैसे होंगे जो खून के अंदर तैरते अथवा रेंगते हुए अपने खास लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ सकते हैं। वैसे शोध दल यह भी मानता है कि इसके बड़े आकार के रोबोट समुद्र में पहरेदारी के काम में भी इस्तेमाल किये जा सकते हैं।