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ग्राहकों की मजबूरी का भी फायदा उठाया कुछ बैंकों ने

मिनिमम बैलेंस कम होने से कमाये उन्नीस हजार करोड़

  • एचडीएफसी ने सबसे ज्यादा कमाये

  • दो सरकारी बैंकों ने पैसे नहीं काटे

  • तिजोरी भरने के तरकीब पर सवाल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हाल ही में जारी एक वित्तीय रिपोर्ट ने बैंकिंग क्षेत्र में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान अपने बैंक खातों में न्यूनतम शेष राशि बनाए न रखने वाले ग्राहकों पर लगाए गए जुर्माने से बैंकों ने 19,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम कमाई की है।

इस खबर ने आम जनता और वित्तीय विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। कई आलोचकों का मानना है कि ग्राहकों की जेब से इस तरह पैसे काटकर बैंक अपनी तिजोरियां भर रहे हैं, जो नैतिक रूप से सही नहीं है। इस संदर्भ में, चार्टर्ड अकाउंटेंट कान बहल ने लिंक्डइन पर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि जो मध्यमवर्गीय और गरीब ग्राहक अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए बैंक में जमा करते हैं, उन्हीं से दंड स्वरूप शुल्क लेना अनुचित है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जुर्माना वसूलने के मामले में निजी क्षेत्र के बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से काफी आगे हैं। रूपी टूल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, निजी बैंकों ने कुल मिलाकर 10,991 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल जुर्माने के माध्यम से जुटाई है, जो कुल वसूले गए जुर्माने का लगभग आधा हिस्सा है।

निजी बैंकों की सूची में एचडीएफसी बैंक सबसे शीर्ष पर है। अकेले इस बैंक ने पिछले तीन वर्षों में ग्राहकों से जुर्माने के रूप में 3,871 करोड़ रुपये वसूले हैं। इसके बाद एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा का स्थान आता है, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये की वसूली की है। सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी पिछले तीन वर्षों में कुल 8,092 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर जमा किए हैं।

राहत की बात यह है कि देश के कुछ बड़े सरकारी बैंकों ने न्यूनतम शेष राशि न रखने पर ग्राहकों से कोई जुर्माना नहीं लिया है। भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक इस सूची में प्रमुख हैं जिन्होंने वर्तमान में इस दंड शुल्क को माफ कर रखा है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन बैंकों ने भी अतीत में जुर्माने के माध्यम से काफी धन अर्जित किया था, लेकिन बाद में जनहित में अपनी नीतियों में बदलाव किया।

ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए रिजर्व बैंक ने अब कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार बैंकों को अब किसी भी ऑटो पेमेंट विकल्प को सक्रिय करने से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ग्राहकों की अनुमति के बिना उनके खाते से कोई भी राशि नहीं काटी जा सकेगी। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैंक अब अतिरिक्त सत्यापन की मांग करेंगे। यह नियम विशेष रूप से ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम, बिजली और पानी के बिल, ईएमआई और यूपीआई आधारित प्रीपेड बिलों के भुगतान पर प्रभावी होंगे। आरबीआई की इस पहल का उद्देश्य बैंकों द्वारा मनमानी कटौती पर लगाम लगाना है।