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रिकार्ड मतदान का निष्कर्ष निकालना कठिन

गनीमत है कि अब तक वोट प्रतिशत और नहीं बढ़ा है

  • सत्ता विरोधी लहर या बदलाव का संकेत?

  • ममता बनर्जी के प्रति अटूट जनसमर्थन?

  • मतदाता सूची का पुनरीक्षण और प्रभाव

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में हुआ रिकॉर्ड मतदान इस समय देश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 23 अप्रैल 2026 को हुए मतदान में राज्य ने लगभग 92 फीसद से अधिक वोटिंग दर्ज कर एक नया इतिहास रच दिया है। यह आंकड़ा न केवल 2021 के चुनाव (82.3 फीसद) से कहीं अधिक है, बल्कि आजादी के बाद से अब तक का सबसे उच्च स्तर है। इतने बड़े पैमाने पर हुए मतदान ने राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों को गहरे मंथन में डाल दिया है। इस मतदान के पीछे मुख्य रूप से दो विरोधी धाराएं देखी जा रही हैं:

राजनीति के कुछ जानकारों का मानना है कि जब भी मतदान का प्रतिशत अप्रत्याशित रूप से बढ़ता है, तो वह अक्सर सत्ताधारी दल के खिलाफ ‘गुस्से’ का प्रतीक होता है। विश्लेषकों के इस वर्ग के अनुसार, हाल ही में मतदाता सूची से करीब 91 लाख नामों के हटाए जाने और नागरिकता से जुड़े मुद्दों ने लोगों के मन में अपने मताधिकार को खोने का डर पैदा किया है। भाजपा समर्थकों और कुछ निर्दलीय विश्लेषकों का तर्क है कि यह भारी मतदान भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ एक मौन क्रांति हो सकती है, जो परिवर्तन की ओर इशारा कर रही है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थकों का दावा है कि यह रिकॉर्ड मतदान दीदी की लोक-कल्याणकारी योजनाओं (जैसे लक्ष्मी भंडार) और उनकी लोकप्रियता पर जनता की मुहर है। मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा है कि लोग अपने ‘वोट के अधिकार’ को बचाने के लिए घरों से बाहर निकले हैं। समर्थकों का तर्क है कि महिलाएं और ग्रामीण मतदाता, जो ममता बनर्जी के सबसे बड़े आधार हैं, उन्होंने भारी संख्या में वोट देकर विपक्षी चुनौतियों को खारिज कर दिया है।

इस बार के चुनाव में सबसे बड़ा मोड़ मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण रहा, जिसमें लगभग 12 फीसद मतदाताओं के नाम हटाए गए। इस प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल का निर्वाचक मंडल 7.6 करोड़ से घटकर 6.8 करोड़ रह गया। जानकारों का मानना है कि नाम कटने के डर और अपनी पहचान साबित करने की होड़ ने भी मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक खींचने में बड़ी भूमिका निभाई है।

फिलहाल, यह कहना कठिन है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। जहाँ दक्षिण दिनाजपुर और कूचबिहार जैसे जिलों में 95 फीसद तक मतदान हुआ है, वहीं मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे क्षेत्रों में भी जबरदस्त उत्साह दिखा है। 4 मई 2026 को आने वाले नतीजे ही यह स्पष्ट करेंगे कि यह ‘रिकॉर्ड मतदान’ ममता बनर्जी के लिए जनसमर्थन की लहर थी या उनके खिलाफ उपजा कोई असंतोष। फिलहाल, बंगाल की जनता ने लोकतंत्र के उत्सव में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराकर पूरी दुनिया को अपनी जागरूकता का संदेश दे दिया है।