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विशाल परग्रही ग्रह के बादल बर्फ के बने है, देखें वीडियो

अंतरिक्ष की नई जानकारी से हैरान हो गये खगोल वैज्ञानिक

  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने दिखाया

  • ग्रह का नाम ऐप्सिलन इंडी एबी रखा है

  • इसका वायुमंडल बहुत अधिक जटिल है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः खगोलविदों ने एक दूरस्थ गैस दानव ग्रह पर कुछ बेहद आश्चर्यजनक खोजा है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी की एलिजाबेथ मैथ्यूज के नेतृत्व में एक टीम द्वारा की गई यह खोज उन मौजूदा मॉडलों को चुनौती देती है जो बाहरी ग्रहों के वायुमंडल के व्यवहार की व्याख्या करते हैं। ऐप्सिलन इंडी एबी नामक यह ग्रह हमारे सौर मंडल के बृहस्पति जैसा है, फिर भी इसका वायुमंडल उम्मीद से कहीं अधिक जटिल दिखाई देता है। यह अध्ययन पृथ्वी जैसे ग्रहों को खोजने और उनके अध्ययन के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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बाहरी ग्रहों की खोज दशकों से जारी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगले कुछ दशकों में दूर के ग्रहों पर जीवन के संकेत मिल सकेंगे। 1995 से 2022 के शुरुआती प्रयासों का मुख्य ध्यान नए ग्रहों की खोज पर था, जहाँ अप्रत्यक्ष तकनीकों के माध्यम से ग्रहों के द्रव्यमान और आकार का पता लगाया जाता था। 2022 में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के लॉन्च ने एक नए युग की शुरुआत की। अब खगोलविद इन ग्रहों के वायुमंडल की संरचना और बनावट का विस्तार से अध्ययन कर पा रहे हैं।

एलिजाबेथ मैथ्यूज बताती हैं कि जेम्स वेब हमें अंततः हमारे सौर मंडल के समान ग्रहों के अध्ययन की अनुमति दे रहा है। यदि कोई एलियन सभ्यता हमसे कई प्रकाश वर्ष दूर होती और सूर्य को देखती, तो जेम्स वेब ही वह पहला टेलीस्कोप होता जो उन्हें बृहस्पति का विस्तार से अध्ययन करने में सक्षम बनाता। हालाँकि, पृथ्वी जैसे ग्रहों के सूक्ष्म अध्ययन के लिए अभी और भी उन्नत भविष्य के टेलीस्कोपों की आवश्यकता होगी।

बृहस्पति जैसे ग्रहों का अध्ययन करना कठिन रहा है क्योंकि अब तक देखे गए अधिकांश गैस दानव बृहस्पति की तुलना में बहुत गर्म हैं। मैथ्यूज और उनकी टीम ने मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट का उपयोग करके ऐप्सिलन इंडी एबी की सीधी तस्वीर ली। इस ग्रह का द्रव्यमान बृहस्पति से 7.6 गुना अधिक है, लेकिन इसका व्यास लगभग समान है।

यह ग्रह अपने तारे से काफी दूर है, जिससे इसका तापमान माइनस 70 से प्लस 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। यह बृहस्पति से थोड़ा गर्म है, जिसका मुख्य कारण ग्रह के निर्माण के समय की बची हुई गर्मी है। अवलोकन के दौरान वैज्ञानिकों को अमोनिया की मात्रा उम्मीद से कम मिली। इसका सबसे संभावित कारण वहां जल-बर्फ के घने बादलों की उपस्थिति है, जो पृथ्वी के सिरस बादलों के समान हैं।

यह खोज इस बात पर जोर देती है कि हमें ग्रहों के वायुमंडलीय कंप्यूटर मॉडलों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। भविष्य में नासा का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप इन ठंडे ग्रहों और जल-बर्फ के बादलों के बारे में और भी स्पष्ट जानकारी प्रदान कर सकेगा, जिससे अंततः ब्रह्मांड में जीवन की खोज का मार्ग प्रशस्त होगा।

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