बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में मितव्ययिता नीति का विरोध
ब्रसेल्सः बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स हाल ही में एक विशाल राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन और उसके बाद भड़की हिंसक घटनाओं का केंद्र बन गई। देश में लगातार बढ़ती महंगाई और बेल्जियम सरकार द्वारा लागू की जा रही बजट कटौती (मितव्ययिता/ऑस्टेरिटी नीतियों) के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने के लिए शुक्रवार को राजधानी की सड़कों पर हजारों की संख्या में आक्रोशित नागरिक उतर आए।
हालांकि यह प्रदर्शन आम लोगों और श्रमिक संगठनों द्वारा अपने अधिकारों की मांग को लेकर आयोजित किया गया था, लेकिन जल्द ही प्रदर्शनकारियों के कुछ उपद्रवी तत्वों और पुलिसकर्मियों के बीच कई मौकों पर तीखी और हिंसक झड़पें देखने को मिलीं।
रिपोर्टों के अनुसार, ब्रसेल्स के व्यस्त और केंद्रीय रेलवे स्टेशन के आसपास स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब काले रंग के कपड़े पहने और चेहरों पर मास्क लगाए दर्जनों नकाबपोश युवाओं ने पुलिस बलों पर पथराव करना और आतिशबाजी व पटाखे फेंकना शुरू कर दिया।
अराजकता फैला रहे इन उपद्रवियों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में आगजनी की घटनाओं को भी अंजाम दिया, जिसमें एक इलेक्ट्रिक स्कूटर को सरेआम जलाते हुए देखा गया। स्थिति को बेकाबू होता देख और हिंसा को और फैलने से रोकने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित और तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और शक्तिशाली वॉटर कैनन का प्रयोग किया।
सड़कों पर हुए इस भारी हंगामे, दंगे और अराजकता के कारण ब्रसेल्स की पूरी यातायात व्यवस्था घंटों तक चरमरा गई और आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बाद में स्पष्ट किया कि यह हिंसा और अशांति उन असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाई गई थी जो मूल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल जन-प्रदर्शन में पूरे देश से आए लगभग 30,000 प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया था।
गौरतलब है कि इस एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान बेल्जियम के दो सबसे बड़े ट्रेड यूनियनों (श्रमिक संगठनों) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। हिंसा की घटनाओं के बाद यूनियन नेताओं ने तुरंत खुद को इस अराजकता से अलग कर लिया और बयान जारी कर कहा कि उपद्रव, तोड़फोड़ और आगजनी के लिए जिम्मेदार लोग उनके संगठन या मजदूर आंदोलन से बिल्कुल भी संबंधित नहीं हैं।
लाल और हरे रंग के कपड़ों में आए असली यूनियन कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पूरे शहर में शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकाला। प्रदर्शन में शामिल होने नामूर शहर से आईं मैरी गोबर्ट (जो एक सिंगल मदर और सोशल वर्कर हैं) ने आम जनता का दर्द बयां करते हुए बताया कि आसमान छूती महंगाई के कारण अब उनके लिए अपना और अपने परिवार का गुज़ारा करना बेहद कठिन हो गया है।