बंगाल चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है
31 सीटों पर दोबारा चुनाव की याचिका
डेरेक ओब्रायन ने दायर की है याचिका
एसआईआर का कोई प्रभाव नहीं पड़ा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डेरेक ओब्रायन की उस याचिका का कड़ा विरोध किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल की 31 विधानसभा सीटों पर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई थी। ईसीआई ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से चुनावी परिणाम किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हुए हैं। आयोग के अनुसार, चुनाव परिणामों को केवल संविधान के अनुच्छेद 329 (बी) के तहत उचित चुनाव याचिकाओं के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है, न कि मतदाता सूची में तकनीकी कमियों या बदलावों के आधार पर।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने पहले ईसीआई को यह बताने का निर्देश दिया था कि वर्तमान में चुनाव ट्रिब्यूनलों के पास कितनी अपीलें लंबित हैं। इसके जवाब में ईसीआई ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत कुल 38,31,429 अपीलें दाखिल की गईं।
इनमें से मतदाताओं द्वारा छोड़े गए, हटाए गए या नाम जोड़े जाने के खिलाफ दायर की गई 37,05,235 अपीलें अभी भी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 1,26,194 अपीलों का ही निपटारा किया जा सका है। आंकड़ों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में सबसे अधिक क्रमशः 7,48,216 और 5,31,617 अपीलें दर्ज की गईं, जिनमें से मुर्शिदाबाद में केवल 595 मामलों का ही फैसला हो पाया है।
डेरेक ओब्रायन ने कोर्ट से यह मांग की थी कि जब तक सभी लंबित अपीलों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक इन 31 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव परिणामों को अमान्य घोषित किया जाए और नए चुनाव कराए जाएं। हालांकि, ईसीआई ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ओडब्ल्यू की मुख्य याचिका उस समय ही निष्प्रभावी (इन्फ्रूक्ट्युअस) हो गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने गत 27 मई को पश्चिम बंगाल एसआईआर अभ्यास को वैध ठहराते हुए अपनी मुहर लगा दी थी।
आयोग ने ओब्रायन पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने मतदाता सूचियों से नाम हटाने की सभी श्रेणियों को जानबूझकर मिलाकर पेश किया है, जिससे एक भ्रामक और गलत नैरेटिव तैयार किया जा सके। ईसीआई ने स्पष्ट किया कि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को कभी भी न्यायिक अधिकारियों के सामने चुनौती के रूप में नहीं रखा गया था।
इसके अलावा, आयोग ने दीनहाटा, खरग्राम, बली और हावड़ा उत्तर जैसी सीटों का हवाला देते हुए बताया कि वहां हटाए गए मतदाताओं की संख्या टीएमसी की हार के अंतर से काफी कम थी। इसने ओब्रायन के उस तर्कहीन सिद्धांत को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि इस न्यायिक प्रक्रिया से चुनावी परिणाम बदल गए। इसके विपरीत, ईसीआई ने उन 21 सीटों का भी जिक्र किया जिन्हें टीएमसी ने जीता था, और वहां भी नाम काटने की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी।
मामले के त्वरित निस्तारण के लिए ईसीआई ने न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाकर राज्य की संसदीय सीटों के बराबर करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने की बात कही है, जिससे न्यायिक अधिकारी अपने घर सहित कहीं से भी ऑनलाइन सुनवाई कर सकें। इस पूरी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 27 अक्टूबर 2025 की पूर्व-ड्राफ्ट सूची के 7,66,37,529 से घटकर 28 फरवरी 2026 की अंतिम सूची में 6,44,52,609 रह गई है।