रायपुर (छत्तीसगढ़): दशकों से माओवादी हिंसा का दंश झेल रहे बस्तर संभाग के दूरस्थ व संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित क्षेत्रों के लिए जिला खनिज न्यास निधि (DMF – District Mineral Foundation) के तय नियमों में विशेष ढील प्रदान की है। इस नीतिगत निर्णय के तहत खनिज संपन्न जिलों में एकत्रित होने वाली भारी-भरकम DMF राशि का उपयोग अब सीधे तौर पर दूरदराज, अति-संवेदनशील और पिछड़े वनांचल क्षेत्रों के विकास व बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जा सकेगा।
📍 15 से 25 किमी की भौगोलिक सीमा खत्म: अंदरूनी इलाकों तक पहुंचेगा विकास
संशोधित नियमों के मुख्य बिंदु और प्रभाव:
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पिछली बाध्यता समाप्त: पूर्व व्यवस्था के अनुसार DMF फंड की राशि का उपयोग केवल खनन (माइनिंग) क्षेत्र के 15 से 25 किलोमीटर के सीमित दायरे में ही अनिवार्य रूप से किया जा सकता था।
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दूरस्थ अंचलों को सीधा लाभ: इस भौगोलिक सीमा के कारण बस्तर संभाग के कई अत्यंत पिछड़े और अंदरूनी गांव आवश्यक विकास योजनाओं व फंड से वंचित रह जाते थे।
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सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा में तेजी: केंद्र की इस नई छूट के बाद भौगोलिक दूरी की बाध्यता समाप्त हो गई है, जिससे अब सीधे नक्सल प्रभावित अंदरूनी गांवों में सड़क, पेयजल, स्कूल और स्वास्थ्य अधोसंरचना के निर्माण में तेजी आएगी।