बस्तर में खनिज विभाग की खुली पोल: कोडेनार के युवाओं ने खुद पकड़े रेत से लदे 8 टिप्पर, अवैध उत्खनन पर फूटा गुस्सा
बस्तर (छत्तीसगढ़): बस्तर जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर प्रशासनिक रोकथाम के दावों की जमीनी हकीकत उजागर हो गई है। कोडेनार क्षेत्र में अवैध रेत खनन और भारी वाहनों की अंधाधुंध आवाजाही से आक्रोशित जागरूक युवाओं और ग्रामीणों ने मोर्चा संभालते हुए रेत से भरे 8 टिप्परों को खुद घेराबंदी कर पकड़ लिया। इस बड़ी घटना ने स्थानीय खनिज (माइनिंग) विभाग और राजस्व अमले की निगरानी व्यवस्था और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
📜 शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, 18 और 19 अगस्त को ग्रामीणों ने खुद बिछाया जाल
लगातार अनदेखी के कारण ग्रामीणों को यह सख्त कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा:
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प्रशासनिक अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने खनिज विभाग और राजस्व अधिकारियों को कई बार लिखित व मौखिक शिकायतें दीं, परंतु रेत माफिया के विरुद्ध कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
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सालभर अवैध परिवहन: इलाके में बिना किसी रोक-टोक के पूरे 12 महीने अवैध रेत का उत्खनन और परिवहन जारी रहता है।
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युवाओं की कार्रवाई: युवा ग्रामीण रवि पोड़ियामी ने बताया कि रात में निगरानी के दौरान युवाओं की टीम ने 18 अगस्त की रात रेत से भरे 7 टिप्पर पकड़े, जबकि 19 अगस्त की सुबह 1 अन्य वाहन को पकड़ा गया।
⛔ मानसून में रेत खनन पर सख्त प्रतिबंध, फिर भी कुम्हारसाड़रा से जारी रही तस्करी
नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पर्यावरण और नदियों को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है:
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प्रतिबंध का उल्लंघन: एनजीटी (NGT) और शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार बारिश के मौसम में नदियों से रेत के उत्खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहता है।
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कुम्हारसाड़रा क्षेत्र से निकासी: इसके बावजूद कोडेनार के कुम्हारसाड़रा इलाके में मजदूरों और मशीनों की सहायता से अवैध तरीके से रेत निकालकर भारी वाहनों के जरिए लगातार भेजी जा रही थी।
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मिलीभगत के आरोप: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और मिलीभगत के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
🚜 भारी वाहनों से सड़कें हुईं बदहाल, एंबुलेंस और बच्चों का आवागमन ठप
अवैध रेत से लदे भारी टिप्परों के बेलगाम संचालन से ग्रामीण बुनियादी ढांचे को गहरा आघात पहुंचा है:
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सड़कें बनीं दलदल: लगातार ओवरलोड वाहनों के चलने से कोडेनार के कोटवारपारा, पटेलपारा, लक्ष्मणपारा, आयतूपारा और गुड्डीपारा जैसे प्रमुख मोहल्लों की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त और खस्ताहाल हो चुकी हैं।
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आपातकालीन सेवाओं पर असर: सड़कों पर गहरे गड्ढे होने के कारण समय पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे मरीजों की जान पर खतरा बना रहता है।
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जनजीवन अस्त-व्यस्त: स्कूली बच्चों का स्कूल जाना, ग्रामीणों का पैदल चलना और मवेशियों को लाना-ले जाना भी बेहद मुश्किल हो गया है।
❓ विभागीय चुप्पी पर उठे सवाल, तोकापाल एसडीएम से नहीं हो सका संपर्क
स्थानीय प्रशासन की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में भारी असंतोष व्याप्त है:
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ग्रामीणों का संकल्प: गांव के सरपंच, उपसरपंच और युवाओं ने दो टूक कहा है कि वे अपने इलाके में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसे पूरी तरह बंद कराया जाएगा।
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कार्रवाई से दूरी: जब अवैध रेत उत्खनन की जानकारी आम जनता को है और शिकायतें दर्ज हैं, तो जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा रहा?
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अधिकारी से संपर्क नहीं: इस संबंध में जब तोकापाल एसडीएम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।