लगातार युद्ध और प्रतिबंधों के बाद रिश्ते सुधारने की पहल
एनपीटी से हटाने की मांग की जनप्रतिनिधियों में
अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी भी जासूसी का काम कर रही है
इसमें होने का ईरान को कोई लाभ नहीं मिल रहा
तेहरानः मशहद से सांसद और संसद के आर्थिक आयोग के एक प्रमुख सदस्य मेसम जोहौरियन ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान साझा किया। इस बयान में हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और देश के अधिकारों तथा सुरक्षा की रक्षा करने में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तंत्र की पूर्ण विफलता का हवाला देते हुए ईरान की एनपीटी सदस्यता पर पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग की गई है।
सांसदों का यह कदम केवल सदस्यता की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के पीठासीन बोर्ड से यह भी आग्रह किया है कि वे सबसे कम संभव समय में इस संधि से पूरी तरह बाहर निकलने की वैधानिक प्रक्रिया को तत्काल सक्रिय करें। इसके साथ ही, उन्होंने समान विचारधारा वाले देशों के साथ वैज्ञानिक, तकनीकी और कानूनी सहयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ाने पर भी जोर दिया।
सांसदों ने तर्क दिया कि एनपीटी अप्रसार के प्रति प्रतिबद्धता और सदस्यों के अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी के पारस्परिक संतुलन पर आधारित है। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने इस मूल संतुलन के पूरी तरह विफल होने को उजागर कर दिया है। उन्होंने संधि के तहत ईरान के न्यूनतम कानूनी अधिकारों को सुरक्षित करने में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की असमर्थता और संरचनात्मक भेदभाव का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह रुख राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण हितों के साथ-साथ दिवंगत इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की उपलब्धियों की रक्षा करने के उनके संवैधानिक दायित्व पर आधारित है।
इस आधिकारिक बयान में संधि से बाहर निकलने के प्रस्ताव के पीछे चार प्रमुख कारणों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे की रक्षा करने में वैश्विक निकायों का असफल होना। परमाणु बुनियादी ढांचे को लक्षित करने वाले सुनियोजित हमले, तोड़फोड़ और देश के प्रमुख वैज्ञानिकों की लक्षित हत्याएं। ईरान को एनपीटी के तहत गारंटीकृत लाभों से कथित तौर पर वंचित रखा जाना। और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षणों का उपयोग जासूसी और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाना।
सांसदों का यह भी तर्क था कि अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों के तहत संचालित होने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं को सैन्य खतरों और हमलों के खिलाफ सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकतम निगरानी स्वीकार करने से ईरानी राष्ट्र को सुरक्षा का एक अंश भी प्राप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह देश की शक्ति के घटकों की पहचान करने और उन्हें निशाना बनाने का एक माध्यम मात्र बन गया है।