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केरल के एमजी विश्वविद्यालय में कॉकरोच का पोस्टर

जंतर मंतर का हाल देखकर अब लोगो देखकर ही बवाल

  • प्रभारी कुलपति ने पोस्टर हटाने को कहा

  • छात्र नेताओँ ने इसका विरोध किया है

  • तेलचट्टा देखकर ही चर्चा का बाजार गर्म

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितताओं के खिलाफ उग्र आंदोलन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी का वर्चुअल शुभंकर अब केरल के महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में एक बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। एक गंदे फर्श पर भारी-भरकम जूते के सामने अपने पिछले पैरों पर डटकर खड़े कॉकरोच का यह चित्र युवाओं के प्रतिरोध और जिजीविषा का प्रतीक बन चुका है। हालांकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया, लेकिन इस अनोखे प्रतीक चिह्न ने विश्वविद्यालय परिसर में नया प्रशासनिक और राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।

महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के छात्र संघ ने 3 से 6 अगस्त तक विश्वविद्यालय के कोट्टायम परिसर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन—डिसकोर्सेस बियॉन्ड बाउंड्रीज: सस्टेनेबल फ्यूचर इन एन एज ऑफ कॉन्फ्लिक्ट के प्रचार के लिए कॉकरोच के चित्रों वाले पोस्टर जारी किए थे। पहला पोस्टर 20 जून को सोशल मीडिया पर जारी किया गया था, जिसमें दो कॉकरोच एक-दूसरे के साथ एकजुटता दिखाते हुए नजर आ रहे थे। यह वही दिन था जब सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अपना अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। इसके बाद 21 जुलाई को दूसरा पोस्टर जारी किया गया, जिसमें एक कॉकरोच एक बड़े जूते के सामने निडरता से खड़ा था और उसके एंटीना बहादुरी से बाहर निकले हुए थे।

यह विवाद उस समय गहरा गया जब महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के अंतरिम कुलपति डॉ. डी. मावूथु ने विश्वविद्यालय परिसर से कॉकरोच शुभंकर वाले सभी पोस्टरों को तत्काल हटाने का निर्देश जारी किया। कुलपति ने अपने आदेश में एक पुराने प्रशासनिक परिपत्र का हवाला दिया, जो विश्वविद्यालय के धन या कोष से आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में राजनीतिक सामग्री, प्रतीकों या नारों के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाता है। प्रशासन का तर्क है कि विश्वविद्यालय निधि से होने वाले शैक्षणिक आयोजनों को किसी भी प्रकार की राजनीतिक विचारधारा या प्रतीकवाद से दूर रखा जाना चाहिए।

दूसरी ओर, विश्वविद्यालय छात्र संघ और छात्र नेताओं ने कुलपति के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि कॉकरोच अब महज एक कीड़ा नहीं, बल्कि दमनकारी नीतियों के खिलाफ छात्रों और आम युवाओं के संघर्ष और अस्तित्व का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। छात्र नेताओं का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में सामयिक और सामाजिक विषयों पर रचनात्मक अभिव्यक्ति को दबाना अनुचित है। पोस्टरों को हटाए जाने के आदेश के बाद परिसर में छात्र गुटों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच गतिरोध कायम है, जिससे आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।