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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई को बैठक

सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सुनवाई के बीच ही नया फैसला

  • एसआईटी रिपोर्ट पर भी चर्चा की उम्मीद

  • नई व्यवस्था पर आगे का फैसला होगा

  • सीईओ की बहाली का मुद्दा भी आयेगा

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आगामी 22 जुलाई को शाम 4 बजे अयोध्या में सभी ट्रस्टियों की एक आपात और उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक के आधिकारिक एजेंडे के अनुसार, ट्रस्टी राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट (यदि निर्धारित समय तक प्राप्त हो जाती है) पर विस्तार से समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही, ट्रस्ट से जुड़ी विभिन्न समितियों के पुनर्गठन और पिछली बैठकों के प्रस्तावों व कार्यवाहियों को औपचारिक मंजूरी देने पर भी इस बैठक में मुहर लगाई जाएगी।

विदित हो कि अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं, जिससे यहाँ भारी मात्रा में दान-दक्षिणा (नकदी, सोना और चांदी) अर्पित की जाती है। हाल ही में इस पवित्र चढ़ावे में बड़ी वित्तीय अनियमितता और चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया था।

SIT की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिसमें पता चला कि मंदिर परिसर के भीतर ही सेवाएं दे रहे कुछ कर्मचारियों और सेवादारों ने इस चोरी को अंजाम दिया था, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां भी हुईं। इस प्रकरण में प्रबंधन की भारी लापरवाही उजागर होने के बाद ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर नैतिक दबाव बढ़ गया था, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है।

नए सीईओ की नियुक्ति और राजनीतिक सरगर्मी इस बड़े विवाद के बाद राम मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, अब पूरे मंदिर प्रबंधन की कमान संभालने के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन और धातुओं के प्रबंधन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और ट्रस्ट के खातों व जांच रिपोर्ट के डेटा को देश के सामने सार्वजनिक किया जाए। 22 जुलाई की यह बैठक मंदिर के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे और इस विवाद के पटाक्षेप के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है।