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शीर्ष अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष को दिये निर्देश

बंगाल के टीएमसी के बागी विधायकों का मामला आया

विधानसभा में दो फाड़ है यह पार्टी

बागी सांसद अलग पार्टी में चले गये

ऐसे मामलों का फैसला तीन माह में हो

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष से आग्रह किया है कि वे 8 अक्टूबर तक रितब्रत बनर्जी गुट के दस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएं। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सोहनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल के आरोप में इन विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की मांग को लेकर यह याचिका दायर की गई थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल की दलीलों पर सुनवाई करते हुए इस रिट याचिका का निपटारा किया। सिबल ने अदालत के समक्ष यह तर्क दिया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला सुनाने में लगातार देरी करने की एक प्रवृत्ति बन गई है, जिसके परिणामस्वरूप बागी गुट को यह घोषणा मिलने का अवसर मिल जाता है कि वे ही असली पार्टी हैं।

अदालत ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष से यह आग्रह करते हुए याचिका का निपटारा कर रही है कि वे केशम मेघचंद्र सिंह बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष के ऐतिहासिक फैसले का पालन करें, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि ये अयोग्यता याचिकाएं 8 जुलाई 2026 को दायर की गई थीं, इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि अध्यक्ष 8 अक्टूबर 2026 तक इस पर अपना निर्णय ले लेंगे।

बेंच ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि इस अदालत ने पहले ही यह व्यवस्था दी है कि अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने की उचित समयावधि के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए। वर्तमान मामले में यह तीन महीने की अवधि 8 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। अदालत को पूरा विश्वास है कि राज्य विधानसभा के अध्यक्ष इन सिद्धांतों से भली-भांति परिचित हैं और वे इस तय अवधि के भीतर उचित निर्णय लेने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

बता दें कि जिन विधायकों के खिलाफ यह याचिका दायर की गई है, उनमें अरुप रॉय, रितब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, सेउली साहा, अखरुज्जमान, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान शामिल हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील कल्याण बंद्योपाध्याय और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड प्रीतिका द्विवेदी अदालत में पेश हुए।