क्या स्लो मोशन और केंद्र के सॉफ्ट स्टैंड से नई ताकत?
चुनावी हार के बाद सीधे मैदान में उतरी
मिट्टी का जंग और मोहन सरकार पर निशाना
कार्तिकेयन की एंट्री से कार्यकर्ता उत्साहित
प्रसन्न मोहंति
भुवनेश्वरः चुनावी हार के 27 महीने बाद आज बीजद ने भुवनेश्वर के निचला पीएमजी मैदान में जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन कर बता दिया कि वह अभी खत्म नहीं हुई है। हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़, शंख वाले झंडे और नवीन पटनायक जिंदाबाद के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। सुबह से ही विभिन्न जिलों से कार्यकर्ता बसों में भरकर पहुंचने लगे थे।
इस मीटिंग के दो प्रमुख पहलू थे। पहला, हार के बाद अपनी ताकत दिखाना और मोहन सरकार को सीधी चेतावनी देना। दूसरा, सुजाता आर. कार्तिकेयन को प्रमोट करना। यह चुनावी हार के बाद उनकी पहली बड़ी पॉलिटिकल एंट्री थी और मंच के पास उनकी मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया।
भाजपा 2024 में ओडिया अस्मिता के नारे पर सत्ता में आई थी। अब बीजद उसी अस्मिता का जवाब मिट्टी से दे रही है। बीजद का आरोप है कि केंद्र का नया एमएमडीआर कानून ओडिशा की मिट्टी और ओडिशा के खनिज पर दिल्ली का कब्जा करवा देगा। नवीन पटनायक ने मंच से गरजते हुए कहा—हमारी माटी ही हमारी अस्मिता है, इसे हम लूटने नहीं देंगे।
एमएमडीआर के मुद्दे को लेकर बीजद विधानसभा में भी जोरदार हंगामा कर रही है, जिसके कारण विधानसभा लगातार पांचवें दिन भी नहीं चल पाई। याद करिए, चुनाव के समय भाजपा ने कहा था कि ओडिया अस्मिता खतरे में है और सरकार आते ही चिटफंड, माइनिंग घोटाले तथा रत्न भंडार की चाबी गायब होने के मामले में बड़ा एक्शन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा था कि ओडिशा का सीएम माटी का बेटा ही होगा।
लेकिन 27 महीने बाद वह बड़ा एक्शन जमीन पर नहीं दिख रहा है। मोहन माझी सरकार का कामकाज स्लो मोशन में चल रहा है, प्रोजेक्ट लटके पड़े हैं और अफसरशाही हावी है। उधर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि केंद्र में भाजपा नवीन पटनायक के प्रति सॉफ्ट स्टैंड ले रही है। क्या मोहन सरकार के इसी स्लो मोशन और केंद्र के सॉफ्ट स्टैंड की वजह से ही बीजद को फिर से ताकत जुटाने और सड़क पर उतरने का मौका मिल रहा है?