चंपत राय और अनिल मिश्रा का त्यागपत्र बैठक में मंजूर
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बैठक के बाद इसका एलान हुआ
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स्थायी महासचिव का चयन बाद में
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लापता घोषित चीजों का प्रदर्शन किया
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः श्री राम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक के बाद संगठन के भीतर एक बड़े प्रशासनिक बदलाव की आधिकारिक घोषणा की गई है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। वर्तमान में दोनों शीर्ष पदाधिकारियों के कार्यभार की जिम्मेदारी अंतरिम रूप से कृष्ण मोहन को सौंप दी गई है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक स्थायी महासचिव के नाम का आधिकारिक एलान नहीं किया गया है।
ट्रस्ट की इस विशेष बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मंत्रोच्चारण के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत की और कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए अनगिनत भक्तों ने अपने प्राण, परिवार और करियर की आहुति दी है। ऐसे पावन स्थल पर हुई वित्तीय अनियमितता और ‘चोरी’ की घटना पूरे समाज को लज्जित और व्यथित करने वाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चोरी की राशि कितनी है, यह जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन इस घटना ने ट्रस्ट को अंदर तक झकझोर दिया है।
बैठक में कानूनी और संवैधानिक नियमों को स्पष्ट करने में देश के प्रख्यात 99 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता और ट्रस्ट के मार्गदर्शक के. पारासरण ने मुख्य भूमिका निभाई। वे पूरी बैठक के दौरान दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। बैठक में जब इस्तीफे को मंजूर करने या न करने पर चर्चा चल रही थी, तब के. पारासरण ने ट्रस्ट के मूल संविधान की धाराओं को पढ़कर सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार यदि कोई पदाधिकारी स्वेच्छा से इस्तीफा देता है, तो वह स्वतः ही प्रभावी माना जाता है और ट्रस्ट के पास उसे स्वीकार करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता। इसके बाद दोनों इस्तीफों को मंजूरी दी गई, हालांकि ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा राम मंदिर आंदोलन और निर्माण कार्य में दिए गए ऐतिहासिक योगदान की सराहना की।
प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी गोविंद देव गिरी ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दानपात्रों के अलावा भगवान के कीमती आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं गायब होने का भ्रम फैलाया जा रहा था। समाज में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट ने मीडिया के सामने 2,800 से अधिक कीमती वस्तुओं का एक आधिकारिक विस्तृत रजिस्टर प्रस्तुत किया।
अफवाहों को शांत करने के लिए ट्रस्ट की ओर से कुछ बेहद कीमती और सुरक्षित रखी गई वस्तुओं को साक्ष्य के तौर पर पत्रकारों को दिखाया गया। कोषाध्यक्ष ने विश्वास दिलाया कि आगामी समय में ट्रस्ट अत्यधिक सतर्कता, सुरक्षा और पूर्ण पारदर्शिता के साथ कार्य करेगा।
आगामी 22 जुलाई को ट्रस्ट की एक और अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें कुछ नए अधिकारियों की नियुक्ति के लिए बनाई गई विशेष समिति अपनी रिपोर्ट देगी। उम्मीद जताई जा रही है कि तब तक इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट भी सामने आ जाएगी, जिससे इस बड़ी साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश हो सकेगा।