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हम 2-डी विधेयकों के लिए तैयार हैं: जयराम रमेश

संसद के मॉनसून सत्र पर पर पहले से विपक्ष की तैयारी जारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले, कांग्रेस ने विश्वास जताया है कि यदि सरकार परिसीमन विधेयक को वापस लाती है, तो एकजुट विपक्ष एक बार फिर इसे रोकने में सक्षम होगा। बता दें कि 17 अप्रैल को एकजुट विपक्ष ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को हरा दिया था, जिसमें महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को गति देने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण का प्रस्ताव था।

श्री रमेश ने कहा, अगर आप उस दिन की स्थिति देखें, तो लोकसभा में 528 सदस्यों ने मतदान किया था। विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत यानी 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। इसके विपरीत सरकार को केवल 298 वोट मिले। अब वे दावा कर रहे हैं कि उनके पास 324 सदस्य हैं, जिसका मतलब है कि वे अभी भी आवश्यक संख्या से काफी पीछे हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार बहुमत के आंकड़े को नीचे लाने के लिए कुछ सांसदों को मतदान से अनुपस्थित (एब्सेंट) रहने की व्यवस्था कर सकती है।

तृणमूल और शिव सेना (यूबीटी) में हालिया विभाजन को विपक्ष के लिए एक गंभीर झटका बताते हुए रमेश ने कहा कि सभी विपक्षी दल अभी भी एक-दूसरे के संपर्क में हैं। 17 अप्रैल को शिव सेना (यूबीटी) के सभी नौ सांसदों और 28 में से 22 तृणमूल सांसदों ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया था।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और कांग्रेस के बीच हालिया तनाव को देखते हुए, क्या द्रमुक की इंडिया गठबंधन से दूरी सरकार को ये विधेयक पारित कराने में मदद कर सकती है? इस सवाल पर रमेश ने कहा, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है जिससे मुझे लगे कि द्रमुक का रुख अचानक भाजपा के प्रति नरम हो गया है। मेरा मानना है कि वे भाजपा का विरोध करना जारी रखेंगे; आखिरकार भाजपा उन सभी सिद्धांतों के विपरीत है जिनके लिए द्रमुक खड़ी रही है।

रमेश ने विस्तार से बताते हुए कहा, मुझे नहीं लगता कि लोग इस बर्खास्तगी विधेयक के असली धोखे को समझ पाए हैं। कोई भी मुख्यमंत्री या मंत्री जो गिरफ्तार होता है और विभिन्न कारणों से जमानत पाने में असमर्थ रहता है, उसे 31वें दिन स्वचालित रूप से बर्खास्त किया जा सकता है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इस विधेयक का उपयोग करके किसी भी राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस सैद्धांतिक रूप से परिसीमन के खिलाफ नहीं है बल्कि वह इस बात को लेकर चिंतित है कि इसे कैसे लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, परिसीमन उस तरह से नहीं किया जाना चाहिए जैसा जम्मू-कश्मीर या असम में किया गया था।