Breaking News in Hindi

कालका शिमला रेल मार्ग पर बोल्डर गिरे

भारी बारिश के बाद काथलीघाट के इलाके में बड़ा भूस्खलन

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी क्रम में, यूनेस्को की प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में शुमार ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे लाइन पर शुक्रवार की दोपहर एक बड़ा भूस्खलन हो गया। यह घटना काथलीघाट और कानो रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित पहाड़ी रेल खंड में घटित हुई, जिसके बाद इस संकीर्ण ट्रैक (नैरो गेज) पर रेल यातायात पूरी तरह से और अस्थायी रूप से बाधित हो गया। रेलवे ट्रैक पर भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरने के कारण सुरक्षा को देखते हुए ट्रेनों के पहिए जहां के तहां थम गए।

भूस्खलन के समय शिमला से कालका की ओर जा रही शिमला-कालका शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 52452) इसी प्रभावित रेल खंड के बेहद करीब पहुँच चुकी थी। इस ट्रेन में कुल 107 यात्री सवार थे। जैसे ही ट्रैक पर मलबा आने की सूचना मिली, रेलवे प्रशासन ने अत्यंत मुस्तैदी दिखाते हुए एहतियात के तौर पर ट्रेन को बीच सफर में ही रोक दिया। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन को आगे ले जाने के बजाय बेहद सावधानी से वापस पीछे काथलीघाट स्टेशन पर लाया गया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

काथलीघाट स्टेशन पर ट्रेन के वापस आने के बाद उत्तर रेलवे ने फंसे हुए मुसाफिरों की सुविधा के लिए तुरंत आपातकालीन कदम उठाए। दुर्गम इलाका होने के कारण यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए रेलवे द्वारा फौरन तीन विशेष बसों का इंतजाम किया गया। सभी प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, ये बसें रात करीब 10:24 बजे काथलीघाट स्टेशन से रवाना हुईं। इन बसों के माध्यम से 97 यात्रियों को सड़क मार्ग से कालका रेलवे स्टेशन पहुँचाया गया, ताकि वे वहां से अपनी आगे की कनेक्टिंग यात्रा पूरी कर सकें।

सड़क मार्ग से कालका पहुँच रहे यात्रियों की आगे की मुख्य ट्रेन न छूटे, इसके लिए रेलवे ने अपनी एक प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेन के समय में भी बदलाव किया। उत्तर रेलवे (अंबाला मंडल) के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक यशंजीत सिंह ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि काथलीघाट में फंसे हुए यात्रियों को समायोजित करने और उन्हें राहत देने के लिए कालका-हावड़ा मेल (ट्रेन संख्या 13052) के निर्धारित प्रस्थान समय को एक घंटे के लिए टालना पड़ा। आवश्यक देरी के बाद यह ट्रेन 5 जुलाई की रात (तड़के) करीब 12:30 बजे कालका से हावड़ा के लिए रवाना हो सकी।

वर्तमान में, रेलवे के शीर्ष तकनीकी अधिकारी और इंजीनियरिंग टीमें प्रभावित काथलीघाट-कानो खंड पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए हैं। मलबे को हटाने और ट्रैक की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की पूरी जांच और ट्रैक के पूरी तरह दुरुस्त होने के बाद ही इस हेरिटेज रूट पर सामान्य ट्रेन संचालन फिर से बहाल किया जाएगा।