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पूरा तंत्र ही छात्रों के खिलाफ, माफी मांगे पीएमः राहुल गांधी

छात्रों के खिलाफ जानलेवा हमला और एके 47 इस्तेमाल पर बवाल

देश में कैसी पुलिस व्यवस्था चल रही है

मौजूद सरकारी तंत्र ही छात्रों के खिलाफ

इनकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश भर में NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद भी यह मुद्दा शांत नहीं हुआ है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा पूरा सरकारी तंत्र छात्रों के खिलाफ पूरी तरह से जानलेवा बन चुका है।

राहुल गांधी का यह तीखा बयान बिहार के सीवान जिले में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और एक वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने के बाद आया है। वायरल वीडियो में पुलिस की डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट का एक कांस्टेबल प्रदर्शनकारी छात्रों पर एके-47 राइफल से गोलीबारी करते हुए दिखाई दे रहा है। इस घटना में कम से कम तीन छात्र घायल हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उक्त कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों की ओर से हुई फायरिंग के जवाब में आत्मरक्षा में गोलियां चलाई गईं।

विपक्ष के नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया, मोदी जी, आपके उस वादे का क्या हुआ जिसमें आपने कहा था कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की जाएगी और जिन्हें हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा कर दिया जाएगा?। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वादों के विपरीत युवाओं पर बर्बरता और जानलेवा हमले किए जा रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को आयोजित संसद चलो मार्च और बिहार बंद के दौरान कई जिलों में सैकड़ों छात्रों पर FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और बिहार में एके-47 की गोलियां चलाई गईं। चाहे उत्तर प्रदेश हो, पश्चिम बंगाल, बिहार या दिल्ली—हर जगह युवाओं की आवाज दबाने के लिए एक जैसा पैटर्न अपनाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि वह देश के युवाओं और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन पर हिंसक हमला करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाएं।