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आरोपी लवकुश मिश्रा ने पत्नी ने नाम खरीदी संपत्ति

राम मंदिर की चढ़ावा चोरी में लीपापोती वाले बयान जारी

  • अचानक से अमीर हो गया यह शख्स

  • इसे अनुकल्प मिश्रा ने रखवाया था

  • सभी के बैंक खातों की जांच जारी

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, लवकुश मिश्रा ने सोहावल तहसील के बनीपुर गांव में अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर जमीन खरीदी है। इस जमीन की रजिस्ट्री 2025 में हुई थी और उन भूखंडों पर दो मकानों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि मिश्रा के पास इस संपत्ति को खरीदने के लिए पैसा कहाँ से आया और क्या इसका सीधा संबंध राम मंदिर दान चोरी घोटाले से है।

इस जांच के बीच अनेक जाने अनजाने चेहरे अब सोशल मीडिया में इस पूरे प्रकरण को ही झूठ और साजिश बताने में जुट गये हैं। इनके मुताबिक यह सब कुछ एक बड़ी साजिश का हिस्सा है और खास तौर पर चंपत राय पूरी तरह ईमानदार व्यक्ति हैं।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, आरोपियों की संपत्ति से जुड़ी परतें खुल रही हैं। रविवार को पुलिस टीम ने रुदौली थाना क्षेत्र के ठाकुरन फगोली इलाके में स्थित लवकुश मिश्रा के घर पर छापेमारी की। पुलिस ने घर की तलाशी ली, दस्तावेजों की छानबीन की और उनके परिवार के सदस्यों से कड़ी पूछताछ की। जांच में यह सामने आया कि लवकुश ने अपनी पत्नी के नाम पर अक्टूबर 2025 में जमीन खरीदी थी, जो अयोध्या शहर के काफी करीब है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया है। गौरतलब है कि दान घोटाले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

दिलचस्प बात यह है कि लवकुश मिश्रा, एक अन्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा का साला है। खबरों के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा की सिफारिश पर ही लवकुश को दान की राशि गिनने का काम सौंपा गया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि राम मंदिर प्रशासन में नौकरी मिलने के बाद लवकुश की जीवनशैली में रातों-रात बड़ा बदलाव आया। जो व्यक्ति पहले किराए के मकान में रहता था, उसने नौकरी मिलने के कुछ समय बाद ही एक लाख रुपये की महंगी बाइक खरीद ली थी।

फिलहाल, जांच दल सभी आरोपियों के बैंक खातों, खर्च करने के तौर-तरीकों और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दान की गई रकम को गिनती के कमरे से बाहर कैसे निकाला गया और इस चोरी की गई धनराशि का अंतिम रूप से कहाँ-कहाँ उपयोग किया गया है। यह जांच पूरे मंदिर प्रशासन और दान प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रही है।