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चंपत राय और अनिल मिश्रा  इस्तीफा दिया

एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद अब मामला गरमाया

  • नैतिकता के आधार पर पद छोड़ा है

  • अनेक लोगों ने सीधा आरोप लगाया

  • एसआईटी ने अनेक खामियां बतायी है

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान के पैसों में हेराफेरी के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस विवाद के सामने आने के कुछ दिनों बाद ही, शुक्रवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों पदाधिकारियों ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया है।

यह इस्तीफे उस समय सामने आए हैं जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन और निगरानी में गंभीर चूक उजागर हुई है। सरकार ने 13 जून को ही इन अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी की जांच में कर्मचारी सत्यापन की प्रक्रिया में खामियां, संवेदनशील क्षेत्रों में कर्मचारियों की आवाजाही पर अपर्याप्त निगरानी, सीसीटीवी सुरक्षा का कमजोर ढांचा और दान को मंदिर से ट्रस्ट कार्यालय और फिर बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच टीम मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के इन्वेंट्री रिकॉर्ड में भी विसंगतियों की जांच कर रही है।

आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई इस मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को ही मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। इन पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति छिपाने और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

आगे की जांच की मांग इधर, भाजपा कार्यकर्ता डॉ. रजनीश सिंह, जिन्होंने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी, ने इस्तीफों को नाकाफी बताया है। उन्होंने इंडिया टुडे टीवी के साथ बातचीत में मांग की है कि केवल इस्तीफे पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोनों पदाधिकारियों की भूमिका और उनकी संपत्तियों की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए। हालांकि, ये आरोप डॉ. रजनीश के निजी दावे हैं और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।