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आश्वासन और एलान के बाद भी गृहमंत्री नहीं आये

ऐसे धमकाने वाले खुद कायर होता हैःकांग्रेस

आने का वादा कर गायब हो गये

किरेण रिजिजू ने भी जानकारी दी थी

अपना बिल भी पेश करने नहीं आये

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में अनुपस्थित रहने पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि उनके नाम से कामकाज सूचीबद्ध होने के बावजूद सदन में न आना यह साबित करता है कि जो लोग दूसरों को धमकाते हैं, वे खुद कायर होते हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि तमाम खबरें प्लांट करने और अपनी अनुपस्थिति के मुद्दे पर कहानी को मोड़ने के निराशाजनक प्रयासों के बावजूद शाह एक बार फिर लोकसभा से नदारद रहे। रमेश ने कहा कि शाह अब लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से 17 दिनों से अनुपस्थित हैं, जिसे उन्होंने बेहद अभूतपूर्व करार दिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है: क्या वह ठीक हैं? क्या नंबर 1 और नंबर 2 के बीच सब कुछ ठीक है? देश जानना चाहता है। उनका यह इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर था।

इस बीच, लोकसभा में मंगलवार को भी विपक्ष के भारी हंगामे और गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग के बीच बिना चर्चा के दो और विधेयक पारित कर दिए गए। सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे दोबारा शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी की और तख्तियां लहराईं। सदस्यों ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदे की कथित चोरी को लेकर भी जमकर नारेबाजी की। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने आवश्यक कागजात पटल पर रखवाए। इसके बाद, राज्य का नाम बदलकर केरलम करने से जुड़ा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 विचार और पारित करने के लिए लिया गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा लाए गए इस विधेयक को भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसी तरह, सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 भी बिना चर्चा के पास कर दिया गया। अब तक लोकसभा से पास किए गए 11 विधेयकों में से केवल दो पर ही चर्चा हो पाई है, जबकि शेष नौ विधेयकों को विपक्षी विरोध के बीच बिना किसी विचार-विमर्श के पारित कर दिया गया है।

बता दें कि विपक्ष पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति की मांग कर रहा है। सरकार द्वारा सोमवार को छात्र प्रदर्शनों पर चर्चा कराने और शाह के जवाब देने के प्रस्ताव के बावजूद गतिरोध समाप्त नहीं हुआ है। कांग्रेस इस बात पर अड़ी है कि गृह मंत्री के जवाब में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर छर्रे (पेलेट) चलाने का आदेश किसने दिया था। इसके अलावा, पार्टी का यह भी कहना है कि राम मंदिर में फंड की कथित चोरी पर चर्चा की उसकी मांग पर समझौता नहीं हो सकता है।