नई सरकार में अड़ंगा लगाने का कार्यक्रम फेल
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के. अन्नामलाई राज्य में एक नया आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उनका उद्देश्य समान विचारधारा वाले लोगों को जोड़ना और एक मजबूत स्वयंसेवक आधार तैयार करना है। चर्चा है कि वे मक्कल सक्ती इयक्कम (जनशक्ति आंदोलन) नाम से इस अभियान की शुरुआत कर सकते हैं।
उनका यह कदम तीन-भाषा नीति को लेकर केंद्र सरकार के साथ उनके मतभेदों के बाद आया है। अन्नामलाई ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए सीबीएसई की तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन को वापस लेने की मांग की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा था कि इससे तमिलनाडु के छात्रों और अभिभावकों पर अनावश्यक मानसिक तनाव पड़ रहा है।
अन्नामलाई 2021 से 2025 तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2020 में राजनीति में प्रवेश करने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने 2021 में एल. मुरुगन की जगह राज्य भाजपा प्रमुख का पद संभाला था। एक स्वच्छ और मुखर चेहरे के रूप में देखे जाने वाले अन्नामलाई को काफी हद तक भाजपा में नई ऊर्जा भरने का श्रेय दिया गया। उनकी आक्रामक शैली और मीडिया में उपस्थिति के कारण वे एक ऐसे नेता बन गए थे, जिनकी बात केंद्रीय नेतृत्व भी सुनता था।
हालांकि, अंततः उनकी कार्यशैली अतिवादी हो गई। सी.एन. अन्नादुरई और जे. जयललिता पर की गई उनकी विवादास्पद टिप्पणियों ने सहयोगी दल अन्नाद्रमुक को नाराज कर दिया। इससे गठबंधन टूट गया और दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, जिसका खामियाजा उन्हें भारी हार के रूप में भुगतना पड़ा, जबकि द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनाव में बड़ी जीत हासिल की।
जब गठबंधन को फिर से बनाने की कोशिशें हुईं, तो सूत्रों के मुताबिक अन्नाद्रमुक प्रमुख ई. पलानीस्वामी ने एक पूर्व शर्त रखी थी—राज्य भाजपा इकाई के नेतृत्व में बदलाव। इसके बाद, अन्नामलाई को हटाकर नैनार नागेंद्रन को राज्य अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।