पेपर लीक मामले में निशाने पर मोदी सरकार के मंत्री भी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह घोटाला सत्ताधारी प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों के शामिल होने और एक पैसा कमाने वाले रैकेट का नतीजा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो बयान में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नीट का लीक हुआ प्रश्नपत्र परीक्षा आयोजित होने से दो दिन पहले ही व्हाट्सएप पर प्रसारित हो गया था, जिसने परीक्षा की तैयारी कर रहे 22 लाख छात्रों की सालों की कड़ी मेहनत को बर्बाद कर दिया। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर जवाबदेही से भागने का भी आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कहा, प्रधानमंत्री को तुरंत धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा मांगना चाहिए या उन्हें बर्खास्त करना चाहिए। और जो लोग पेपर लीक के दोषी हैं, उन्हें जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए। उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा, यह आरएसएस, भाजपा से जुड़े लोगों और आरएसएस के प्रति निष्ठा रखने वाले विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (वाइस-चांसलर्स) के बीच का एक गठजोड़ है। यह मुनाफाखोरी और पैसा कमाने के इसी गठजोड़ का नतीजा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि भाजपा सरकार के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए अमृत काल वास्तव में मृत काल साबित हो रहा है। उन्होंने इस विवाद के बाद नीट अभ्यर्थियों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं की दुखद रिपोर्टों का हवाला दिया। खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, रिपोर्टों के अनुसार, नीट पेपर लीक घोटाले के सदमे और मानसिक तनाव के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है। लखीमपुर खीरी के रितिक मिश्रा, दिल्ली की 20 वर्षीय अंशिका पांडे, राजस्थान के झुंझुनू के प्रदीप मेघवाल और गोवा में रहने वाले बेंगलुरु के एक छात्र—इन सभी ने यह दुखद कदम उठाया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक 90 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे 90 मिलियन (9 करोड़) से अधिक छात्र और उनके परिवार प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भाजपा पर एक ऐसे पेपर लीक माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया जो सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। खड़गे ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।