अफगानिस्तान के साथ युद्धविराम पर फिर से खतरा मंडराया
एजेंसियां
बाजौरः उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में एक सुरक्षा परिसर पर हुए आत्मघाती हमले में कई अर्धसैनिक अधिकारियों की मौत हो गई है, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तानी तालिबान ने ली है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, एक सशस्त्र समूह ने विस्फोटकों से भरे वाहन को बाजौर जिला शिविर के मुख्य द्वार से टकरा दिया और इसके बाद दोनों ओर से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। सीमावर्ती क्षेत्र में घातक घटनाओं के सिलसिले की यह नवीनतम कड़ी है, जो इस्लामाबाद और काबुल के बीच नाजुक युद्धविराम के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि वाहन के टकराते ही एक भीषण विस्फोट हुआ। इसके तुरंत बाद हमलावर शिविर में घुस गए और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में आठ या नौ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। समाचार एजेंसी एएफपी ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में कम से कम 10 हमलावर भी मारे गए, जबकि लगभग 35 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।
बाजौर शहर में मौजूद लोगों ने बताया कि विस्फोट के झटके परिसर से 20 किलोमीटर (12 मील) से अधिक दूर स्थित बाजारों में भी महसूस किए गए। सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि अग्रिम चौकी के अधिकांश ढांचे नष्ट हो गए हैं या आग की लपटों में झुलस गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य बलों ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया है और अफगानिस्तान के साथ लगती पहाड़ी सीमा पर स्थित इस परिसर को चारों तरफ से घेर लिया है।
पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकने का लक्ष्य रखने वाले पाकिस्तानी तालिबान ने पत्रकारों को जारी बयानों में इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस्लामाबाद का दावा है कि अफगानिस्तान उन सशस्त्र समूहों को पनाह दे रहा है जो पाकिस्तान के भीतर हमलों को अंजाम देते हैं, हालांकि काबुल की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। ज्ञात हो कि पाकिस्तानी तालिबान, अफगानिस्तान के तालिबान से एक अलग समूह है, जिसने 2021 में वहां की सत्ता पर कब्जा किया था।
यह हालिया हमला इसी क्षेत्र में हुए कई अन्य हमलों के बाद हुआ है, जिनमें पिछले कुछ दिनों में 20 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। फरवरी से यह मनमुटाव दोनों देशों के बीच सीमा पार झड़पों में बदल गया, जिसे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने खुला युद्ध घोषित कर दिया था। मार्च में एक संक्षिप्त ठहराव पर सहमति बनी थी, लेकिन छिटपुट हिंसा फिर से भड़क उठी। पिछले महीने इस्लामाबाद और काबुल ने चीन की मध्यस्थता में हुई चर्चाओं में तनाव बढ़ाने से बचने पर सहमति जताई थी।