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चाबहार बंदरगाह को न छोड़े भारतः अराघची

ईरान के विदेश मंत्री ने दिल्ली दौरे में कही महत्वपूर्ण बात

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के बीच सहयोग का एक बड़ा प्रतीक बताते हुए इस बात पर जोर दिया है कि नई दिल्ली को अमेरिकी प्रतिबंधों से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद इस रणनीतिक परियोजना में अपना निवेश जारी रखना चाहिए। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए अराघची ने यह बात कही। इसके साथ ही उन्होंने भारत से मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी राजनयिक भूमिका निभाने का भी आह्वान किया।

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, चाबहार बंदरगाह ईरान और भारत के बीच सहयोग के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक है। हमें इस बात की बेहद खुशी है कि भारतीयों ने इस बंदरगाह के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर दुख भी जताया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना में होने वाले निवेश की रफ्तार धीमी हो गई है।

दरअसल, पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए भू-आबद्ध (लैंडलॉक्ड) अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए भारत के इस प्रवेश द्वार—चाबहार बंदरगाह को अमेरिकी प्रतिबंधों से जो छूट मिली हुई थी, वह इसी साल 26 अप्रैल को समाप्त हो गई है। साल 2024 में भारत ने ईरान के साथ इसके शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का एक दीर्घकालिक समझौता किया था।

अब तक भारत ने इस परियोजना के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद में लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। हालांकि, इस साल के केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने चाबहार बंदरगाह के लिए कोई विशेष फंड आवंटित नहीं किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट की अवधि खत्म होने के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि वह चाबहार में अपने हितों की रक्षा के लिए अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही भारत एक बैकअप योजना (प्लान बी) पर भी काम कर रहा है, जिसके तहत प्रतिबंधों की अवधि के दौरान भारत अस्थायी रूप से चाबहार परियोजना में अपनी हिस्सेदारी किसी स्थानीय ईरानी संस्था को हस्तांतरित कर सकता है।