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विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर से की बात

ईरान में भीषण विरोध प्रदर्शनों और अमेरिकी धमकी के बीच कूटनीति

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः ईरान की राजधानी तेहरान समेत देश के विभिन्न हिस्सों में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शनों और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच, पश्चिम एशिया का कूटनीतिक माहौल अत्यंत गरमा गया है। इसी अस्थिरता के बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बुधवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर लंबी वार्ता की।

इस बातचीत का प्राथमिक उद्देश्य न केवल ईरान की वर्तमान आंतरिक सुरक्षा स्थिति पर चर्चा करना था, बल्कि क्षेत्र में तेजी से बदल रहे सुरक्षा समीकरणों और संभावित अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के खतरों से भारत को अवगत कराना भी था। इस आकस्मिक वार्ता का एक बड़ा परिणाम यह रहा कि अराघची को अपनी 15 जनवरी की पूर्व-निर्धारित नई दिल्ली यात्रा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना पड़ा।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बातचीत की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर साझा किया कि उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष के साथ ईरान और उसके आसपास के विकसित होते घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की है। हालांकि, कूटनीतिक संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत के गोपनीय विवरणों को सार्वजनिक नहीं किया है। दूसरी ओर, ईरान में सरकार द्वारा लागू किए गए इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण वहां की आधिकारिक सरकारी वेबसाइटें और संचार माध्यम पूरी तरह ठप हैं, जिससे ईरानी पक्ष का कोई भी औपचारिक बयान सामने नहीं आ पाया है।

यह कूटनीतिक संवाद उस समय हुआ जब भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने लगभग 10,000 नागरिकों, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों और पेशेवर कामगारों की है, के लिए तत्काल प्रभाव से ट्रेवल एडवाइजरी जारी कर उन्हें देश छोड़ने की सलाह दी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिसे वहां के इतिहास का सबसे भीषण दमनकारी काल माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और फांसी की सजा देना बंद नहीं किया, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई और सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।

भारत के लिए यह संकट द्विआयामी है। एक तरफ, भारत के रणनीतिक हित चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा से जुड़े हैं, जो मध्य एशिया और रूस तक पहुंच के लिए अनिवार्य हैं।

दूसरी तरफ, ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन कर दिया है। यदि क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर भारत की तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा।