Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
चीन तक जा पहुंचा है नेपाल के विनाशकारी बाढ़ का असर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में फिर हुआ आतंकवादी हमला दिल्ली में जलभराव पर LG संधू का सख्त एक्शन: 139 हॉटस्पॉट पर उतरेगा PWD, इंजीनियर-इन-चीफ से लेकर SE त... नौसैनिक जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन में जान देने की कोशिश नवी मुंबई में वोटर लिस्ट के 3404 SIR फॉर्म लीक: BJYM नेता फोटोकॉपी कराते रंगे हाथों पकड़ा, 5 BLO सस्... नेपाल में ग्लेशियल झील फटने से बिहार में हाई अलर्ट: गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोले गए, कोसी-सारण तटबं... नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर विनाशकारी बाढ़: नेपाल में खुली तबाही, चीन में आंकड़ों पर रहस्य बदले माहौल में अब भाषण से काम नहीं चलेगा कर्नाटक की सरकार ने आग लगने के पहले इंतजाम किया अपनी कुर्सी छोड़ मंत्रियों के बीच बैठे सीएम विजय

Sehore Sharbati Gehu: सुनहरी चमक और बेमिसाल स्वाद, देश-दुनिया में बढ़ी मध्य प्रदेश के ‘शरबती गेहूं’ की डिमांड

सीहोर: अपनी विशिष्ट मिठास, सुनहरी चमक और बेमिसाल गुणवत्ता के लिए गोल्डन ग्रेन (स्वर्ण दाना) के नाम से मशहूर सीहोर का शरबती गेहूं आज न केवल भारत बल्कि सात समंदर पार भी जिले का मान बड़ा रहा है. सीहोर की ए-क्लास कृषि उपज मंडी इन दिनों शरबती की खुशबू से महक रही है. आलम यह है कि विशाल मंडी प्रांगण अपनी क्षमता से अधिक भरा हुआ है और जहां तक नजर जाती है, वहां सिर्फ शरबती के ढेर और अपनी मेहनत का वाजिब दाम पाकर मुस्कुराते अन्नदाता नजर आ रहे हैं.

सीहोर मंडी की साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां केवल स्थानीय किसान ही नहीं, बल्कि देवास, शाजापुर, रायसेन, भोपाल और राजगढ़ जैसे पड़ोसी जिलों के किसान भी अपनी फल लेकर पहुंच रहे हैं. शाजापुर के कालापीपल से आए किसान नेमसिंह ठाकुर बताते हैं कि, ”शाजापुर मंडी की तुलना में सीहोर में भाव बेहतर मिलता है. यहां 4800 से 5200 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे हैं, जिससे घर के शादी-ब्याह और बैंक के काम आसानी से निपट जाएंगे.”

जीआई टैग और बढ़ता रकबा
उप संचालक कृषि अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि, ”साल दर साल शरबती का रकबा बढ़ रहा है. वर्ष 2021-22 में जहां यह 35 हजार 610 हेक्टेयर था, वहीं 2024-25 में यह बढक़र 40 हजार 390 हेक्टेयर तक पहुंच गया है. एक जिला-एक उत्पाद के तहत इसे विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है. जिले को मिले जीआई टैग ने इसकी अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग को नई ऊंचाई दी है. रेवा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से 515 किसान पंजीकृत हो चुके हैं और अब तक 20 हजार 390 हेक्टेयर अतिरिक्त रकबा बढ़ चुका है.

क्यों खास है यहां का शरबती
मंडी के प्रतिष्ठित व्यापारी राजेश खण्डेलवाल कहते हैं कि, ”सीहोर की मिट्टी और जलवायु शरबती के लिए वरदान है. यह दो पानी का गेहूं कहलाता है, जो कम सिंचाई में भी बेहतरीन चमक और मिठास देता है. देशभर के व्यापारी सीहोरी गेहूं के नाम पर अपना माल बेचते हैं, लेकिन असली शरबती केवल सीहोर की माटी से ही निकलता है. मुंबई, पुणे, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे महानगरों में इसकी सबसे ज्यादा मांग है.”

विदेशी निर्यात और निवेश की राह
सीहोर का शरबती अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है. उद्यानिकी विभाग द्वारा 28 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्वीकृत की गई हैं. वहीं आईटीसी कंपनी को फूड प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 54 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है, जिसमें 651 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इससे भविष्य में शरबती के आटे और अन्य उत्पादों का निर्यात और आसान होगा.

आर्थिक गतिविधियों को मिली नई रफ्तार
मंडी में बंपर आवक से न केवल व्यापार जगत में उत्साह है, बल्कि परिवहन, हम्माली और छोटे व्यवसायों में भी तेजी आई है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय तनाव (ईरान-इजराइल युद्ध) के कारण निर्यात में आंशिक बाधाएं आई हैं, फिर भी सीहोर का शरबती अपनी गुणवत्ता के दम पर किसानों को संतुष्ट कर रहा है.

मुख्य विशेषताएं
औसत उत्पादकता: 2700-2800 किग्रा प्रति हेक्टेयर
उन्नत किस्में: सुजाता, सी-306, एचआई-1544, एचआई-1634 और एचआई-1640
कीमत का अंतर: सामान्य गेहूं जहां 2000-3200 रुपए में बिकता है, वहीं शरबती 3500 से 6000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकता है.