कहा, न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों की केस में भूमिका नहीं
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दोनों सरकारी वकील है यह स्वीकारा
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इस केस से कोई जुड़ाव नहीं है उनका
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केजरीवाल ने जज को शर्मिंदा किया है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली उच्च न्यायालय में आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर उस अतिरिक्त हलफनामे का कड़ा विरोध किया है, जिसमें न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाया गया था। केजरीवाल ने तर्क दिया था कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकील पैनल में शामिल हैं, इसलिए उन्हें शराब नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए।
सीबीआई ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों—ईशान शर्मा और शांभवी शर्मा—ने शराब नीति से संबंधित किसी भी मामले में कभी भी किसी की सहायता नहीं की है और न ही वे किसी भी क्षमता में इस कार्यवाही का हिस्सा रहे हैं। हलफनामे के अनुसार, दोनों स्वतंत्र रूप से वकालत करते हैं और किसी वरिष्ठ वकील के साथ भी नहीं जुड़े हैं। सीबीआई ने यह भी बताया कि ईशान शर्मा साल 2022 से ही पैनल में हैं, जबकि केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि उन्हें हाल ही में 2025 में नियुक्त किया गया है।
जांच एजेंसी ने केजरीवाल के तर्कों को अराजक प्रथा करार देते हुए कहा कि यदि इस तर्क को स्वीकार कर लिया गया, तो कोई भी न्यायाधीश केंद्र या राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अयोग्य हो जाएगा, क्योंकि कहीं न कहीं किसी जज का कोई रिश्तेदार सरकारी पैनल में हो सकता है।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक सुन नियोजित और जहरीला अभियान चलाया जा रहा है। एजेंसी का दावा है कि केजरीवाल के पास संबंधित जानकारी 18 मार्च से थी, लेकिन उन्होंने इसे तब सार्वजनिक किया और ट्वीट किया जब 6 अप्रैल को अदालत ने सीबीआई से जवाब मांगा। सीबीआई के अनुसार, इस अभियान का एकमात्र उद्देश्य न्यायाधीश को शर्मिंदा करना या पीठ पर दबाव बनाना है ताकि मनचाहा परिणाम प्राप्त किया जा सके।
सीबीआई ने जोर देकर कहा कि इस तरह की भ्रामक सूचनाओं के जरिए न्यायाधीशों को डराने या उनके चरित्र हनन की कोशिशों को शुरुआत में ही कुचल देना चाहिए। हलफनामे में कहा गया, यह समय है कि इस संवैधानिक अदालत से यह संदेश जाए कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके कोई भी न्यायाधीश को प्रभावित नहीं कर सकता।
केजरीवाल के तर्क दूसरी ओर, व्यक्तिगत रूप से पेश हुए अरविंद केजरीवाल ने दलील दी कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे भारत के सॉलिसिटर जनरल के अधीन काम करते हैं, जो स्वयं इस मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह हितों के टकराव का सीधा मामला है और स्थापित परंपराओं के अनुसार न्यायाधीश को ऐसे मामलों से हट जाना चाहिए। फिलहाल, न्यायमूर्ति शर्मा ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों द्वारा दायर रिक्यूज़ल (सुनवाई से हटने) की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।