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महाराष्ट्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी जांच के दायरे में

शेल कंपनियों पर सीबीआई की नजर पड़ी है

  • किराना दुकान के पते पर कंपनी

  • दूसरी कंपनियों का अस्तित्व नहीं

  • धनशोधन के मामलों की जांच जारी

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक ऐसे संदिग्ध नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें अधिकारी के परिवार से जुड़ी कई कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन शेल फर्मों का उपयोग अवैध धन की लेयरिंग और उसे रूट करने के लिए किया जा रहा था। यह पूरा मामला इगतपुरी कॉल सेंटर रैकेट और उससे जुड़े साइबर धोखाधड़ी अभियानों से जुड़ा बताया जा रहा है।

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि अधिकारी के परिवार से जुड़ी लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्में जिन पतों पर पंजीकृत थीं, वहां वास्तव में कोई ऑफिस है ही नहीं। यह कंपनी, जो 2023 में बनाई गई थी, उसका पंजीकृत पता थणे की एक दुकान का था। जब वहां भौतिक निरीक्षण किया गया, तो उस स्थान पर एक छोटा सा किराना स्टोर चलता हुआ पाया गया। वहां उस परामर्श कंपनी का कोई नामोनिशान नहीं था।

कई अन्य फर्में भी ऐसे ही असत्यापित पतों, छोटी खुदरा दुकानों या असंबंधित कार्यालयों के पतों पर दर्ज मिली हैं। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ये कंपनियां केवल कागजी संस्थाएं हैं, जिनका वास्तविक परिचालन शून्य है। सीबीआई इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इन कंपनियों का इस्तेमाल इगतपुरी में चल रहे अवैध कॉल सेंटर रैकेट से प्राप्त धन को सफेद करने के लिए किया गया था। आरोप है कि उक्त अधिकारी ने इस अवैध रैकेट को संरक्षण प्रदान किया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि साइबर धोखाधड़ी से होने वाली कमाई को इन्हीं फर्जी परामर्श फर्मों के माध्यम से घुमाया (Route) गया था।

जांच के घेरे में आई एक प्रमुख फर्म दावा करती है कि वह व्यवसायों के लिए बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के माध्यम से डेट सिंडिकेशन, प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग और स्ट्रक्चर्ड फंडिंग की सुविधा प्रदान करती है। हालांकि, धरातल पर इस कंपनी के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं मिला है। यह अधिकारी पहले से ही अशोक खरात मामले में भी अलग से आरोपों का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी नाजुक हो गई है।

सीबीआई अब इन कंपनियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि धन के अंतिम स्रोत का पता लगाया जा सके। यदि यह साबित हो जाता है कि इन कंपनियों का उपयोग अवैध धन को वैध बनाने के लिए किया गया था, तो संबंधित अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।